
शराबबंदी कानून का अध्ययन करने के लिए इन दिनों राजस्थान से एक टीम बिहार पहुंची है. इस टीम के सदस्य बिहार के कई जिलों का दौरा करेंगे और शराबबंदी के कारण जमीनी स्तर पर बदलाव का पता लगाने की कोशिश करेंगे और सीएम गहलोत को रिपोर्ट देंगे.
बिहार और गुजरात के बाद देश में शराबबंदी कानून लागू करने वाला राजस्थान तीसरा राज्य बन सकता है। फिलहाल राज्य सरकार की ओर से राज्य में शराबबंदी कानून लागू करने के संकेत मिल रहे हैं. वहीं यह भी माना जा रहा है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इसी मुद्दे पर चुनावी मैदान में उतरेगी. राज्य में शराबबंदी कानून को लेकर जब सारी संभावनाएं उजागर हुईं तो राजस्थान से पांच सदस्यीय टीम शराबबंदी का अध्ययन करने बिहार पहुंची. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बताया जा रहा है कि सरकार के निर्देशानुसार इस टीम को आबकारी एवं शराब बंदी नीति के प्रावधानों के तहत शराबबंदी की मांग से जुड़े पहलुओं का अध्ययन करने के लिए भेजा गया है.
मंगलवार को राजस्थान की यह टीम शराबबंदी का अध्ययन करने बिहार पहुंची और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाकात की. वहीं टीम के सदस्यों ने बिहार में पूर्ण शराबबंदी के सफल क्रियान्वयन पर सीएम से चर्चा की. माना जा रहा है कि पूरी शराबबंदी को सफल बनाने से लेकर इसके नुकसान तक की पूरी जानकारी हासिल करने के लिए टीम वहां गई है.
शराब से भारी सरकारी राजस्व उत्पन्न होता है
आपको बता दें कि राजस्थान से बिहार के पटना पहुंची पांच सदस्यीय टीम का नेतृत्व पूजा भारती छाबड़ा कर रही हैं, जो कई सालों से राजस्थान समेत पूरे देश में शराबबंदी के लिए अभियान चला रही हैं. पूजा अपने अभियान को लेकर कहती हैं कि शराबबंदी से बिहार की जनता को होने वाले फायदे और नुकसान का आकलन किया जा रहा है. वहीं पूजा यह भी पता लगा रही है कि शराबबंदी से सरकारी राजस्व में कितनी कमी आई है.
पूजा ने आगे बताया कि टीम के सदस्य बिहार के कई जिलों का दौरा करेंगे और शराबबंदी के कारण जमीनी स्तर पर बदलाव का पता लगाने की कोशिश करेंगे. साथ ही हम यह भी देखेंगे कि लोगों के जीवन स्तर में कितना सुधार आया है। उन्होंने कहा कि सीएम नीतीश कुमार ने महिलाओं की मांग पर बिहार में शराबबंदी कानून लागू किया, जिसकी चर्चा पूरे देश में हुई.
पूजा के मुताबिक बिहार में शराबबंदी कानून का अध्ययन करने के बाद टीम रिपोर्ट तैयार कर गहलोत सरकार को सौंपेगी. हालांकि इस रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का फैसला अभी समय के गर्भ में है।
