
मणिपुर के नोनी जिले में भूस्खलन से मरने वालों की संख्या 30 हुई जबकि 35 लोग अभी भी मिट्टी के नीचे दबे हुए हैं। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, मलबे से निकाले गए 30 लोगों में से 18 प्रादेशिक सेना के जवान हैं। वहीं, 3 लोगों की अभी शिनाख्त नहीं हो पाई है।
गुरुवार तक प्रादेशिक सेना के 13 जवानों और पांच नागरिकों को बचा लिया गया था। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और पुलिस संयुक्त बचाव अभियान चला रही है। बचाव कार्य में तेजी लाने के लिए ‘थ्रू-वॉल इमेजिंग रडार’ की मदद ली जा रही है।
जमीन के नीचे फंसे लोगों को निकालने के लिए थ्रू वॉल इमेजिंग रडार का इस्तेमाल किया जा रहा है।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह खुद मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान का निरीक्षण किया. उनके साथ राज्य सरकार के कई मंत्री भी थे। हादसे में शहीद हुए जवानों के शवों को सम्मान के साथ उनके घर भेजा जा रहा है.
सीएम ने किया मदद का ऐलान
मुख्यमंत्री ने हादसे में मारे गए लोगों को एक लाख रुपये और घायलों के इलाज के लिए 50-50 हजार रुपये देने की घोषणा की है. पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश से पूर्वोत्तर के राज्य बाढ़ जैसे हालात में हैं।
भूस्खलन ने इज़ाई नदी के प्रवाह को प्रभावित किया है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
बुधवार की रात भारी बारिश के कारण तुपुर रेलवे स्टेशन से सटी पहाड़ी गिरकर निर्माणाधीन स्टेशन यार्ड पर जा गिरी। जिरीबाम से इंफाल तक रेल लाइन बिछाई जा रही है। इसकी रक्षा के लिए यहां सैनिकों का कैंप लगाया गया था।
निचले इलाकों में तबाही की आशंका
भूस्खलन ने इज़ाई नदी के प्रवाह को प्रभावित किया है। यह नदी तामेंगलोंग और नोनी जिलों से होकर बहती है। जिला प्रशासन ने आसपास के ग्रामीणों को सतर्क रहने और जल्द से जल्द परिसर खाली करने की सलाह दी है.
