
- बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए NDA के सीट बंटवारे में BJP और JDU को 101-101 सीटें मिली हैं, जो राज्य की राजनीति में नए शक्ति संतुलन का स्पष्ट संकेत है।
- चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को 29 सीटें देकर BJP ने उन्हें राज्य में दलित नेतृत्व के नए चेहरे के रूप में स्थापित करने की अपनी रणनीति को उजागर किया है।
- इस बंटवारे से यह स्पष्ट है कि नीतीश कुमार की JDU अब गठबंधन में ‘ड्राइविंग सीट’ पर नहीं है और BJP अगले चरण में राज्य का नेतृत्व हासिल करने की तैयारी कर रही है।
पटना, 13 अक्टूबर: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीट बंटवारे को लेकर चला लंबा ‘समुद्र मंथन’ आखिरकार पूरा हो गया है। एनडीए ने अपने आधिकारिक सीट बंटवारे के फॉर्मूले का ऐलान कर दिया है, जिससे राज्य की राजनीति में एक नया समीकरण और शक्ति संतुलन उभरकर सामने आया है। इस फॉर्मूले के तहत, दो सबसे बड़ी पार्टियों – भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) – को बराबर-बराबर सीटें मिली हैं।
सीटों का वितरण इस प्रकार है:
BJP: 101 सीटें
JDU: 101 सीटें
चिराग पासवान (लोजपा-रा): 29 सीटें
जीतन राम मांझी (हम): 6 सीटें
उपेंद्र कुशवाहा (रालोमो): 6 सीटें
यह बंटवारा बिहार की राजनीति में दूरगामी परिणाम देने वाले दो बड़े निष्कर्षों की ओर इशारा करता है, जो BJP के ‘सीक्रेट प्लान’ को उजागर करते हैं।
JDU की घटी ताकत, BJP का बढ़ा दबदबा
सीट बंटवारे से निकला पहला और सबसे स्पष्ट निष्कर्ष यह है कि नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) अब गठबंधन में ‘ड्राइविंग सीट’ पर नहीं रही। 2020 के पिछले विधानसभा चुनाव में JDU को मिली कम सीटों के बाद से ही यह संकेत मिल रहे थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी यह प्रवृत्ति दिखी थी, जब दोनों पार्टियों ने क्रमशः 17 और 16 सीटों पर चुनाव लड़ा था।
इस विधानसभा चुनाव में BJP और JDU को बराबर 101-101 सीटें मिलना यह साफ करता है कि BJP अब ‘छोटे भाई’ की भूमिका में नहीं रहेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP अब सत्ता के संतुलन को बनाए रखते हुए, अगले चरण में राज्य का नेतृत्व अपने हाथ में लेने की तैयारी कर रही है। सीट बंटवारे में समानता स्थापित करके, BJP ने गठबंधन में अपना दबदबा बढ़ा लिया है और यह संदेश दिया है कि JDU की पिछली एकाधिकार की स्थिति अब समाप्त हो चुकी है।
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चिराग पासवान फैक्टर: BJP की नई दलित रणनीति
इस सीट बंटवारे का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष चिराग पासवान के बढ़ते राजनीतिक कद और उन पर BJP के विशेष फोकस से जुड़ा है। लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को 29 सीटें मिलना कोई मामूली बात नहीं है। यह संख्या जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियों को मिली सीटों के योग से भी अधिक है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, 29 सीटों का यह बड़ा हिस्सा देकर BJP ने यह साफ संकेत दिया है कि वह अब बिहार की राजनीति में अपनी निर्भरता पूरी तरह से नीतीश कुमार पर नहीं रखना चाहती है। पिछले चुनावों में चिराग पासवान ने JDU को नुकसान पहुंचाया था, जिसे BJP अब अपने पक्ष में भुनाने की फिराक में है।
विश्लेषण के अनुसार, BJP की यह रणनीति दोहरे लक्ष्य साधती है:
दलित वोट बैंक पर फोकस: चिराग पासवान को इतनी सीटें देकर BJP न केवल उनके राजनीतिक प्रभाव को मान्यता दे रही है, बल्कि उन्हें राज्य के दलित नेतृत्व के एक मजबूत नए चेहरे के रूप में भी आगे बढ़ा रही है। यह रणनीति बिहार में दलित वोट बैंक को मजबूत करने और उस पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश है, जिसे राम विलास पासवान ने वर्षों तक संभाला था।
नीतीश कुमार पर दबाव: चिराग को मजबूत करके BJP ने JDU पर एक राजनीतिक दबाव भी बनाया है, जिससे गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन BJP के पक्ष में झुका रहे।
मांझी की सीटों में कटौती और कुशवाहा का समायोजन
इस ‘समायोजन की राजनीति’ में जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ को सबसे अधिक प्रभावित माना जा रहा है। उनकी पार्टी को पिछली बार की तुलना में एक सीट कम, यानी केवल छह सीटें मिली हैं। सूत्रों का कहना है कि मांझी की सीटें कम करके चिराग पासवान को संतुष्ट करने के लिए दी गई हैं। इससे यह साफ हो गया है कि एनडीए का ध्यान अब राज्य के दलित नेतृत्व को एक मजबूत और युवा चेहरा प्रदान करने पर है, और वह चेहरा अब मांझी नहीं, बल्कि युवा चिराग पासवान हैं।
वहीं, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोमो को भी छह सीटें मिली हैं। कुशवाहा को सीट बंटवारे पर हालांकि कुछ भावुक बयान देने पड़े थे, लेकिन गठबंधन में उनका शामिल होना NDA की कुशवाहा (कोइरी) वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है।
कुल मिलाकर, बिहार NDA सीट बंटवारे ने 2025 के विधानसभा चुनाव के लिए BJP की दीर्घकालिक रणनीति को उजागर कर दिया है, जिसमें JDU पर निर्भरता कम करना और चिराग पासवान को भविष्य के दलित चेहरे के रूप में स्थापित करके अपने दम पर राज्य में सत्ता हासिल करने की तैयारी करना शामिल है।
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