
नई दिल्ली, 28 फरवरी:
हवाई मार्गों में बड़ा बदलाव और सुरक्षा चिंता
ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच जारी संघर्ष ने दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई गलियारों में से एक को असुरक्षित बना दिया है। एयर इंडिया और इंडिगो, जो आमतौर पर यूरोप और मध्य पूर्व के देशों के लिए ईरानी हवाई क्षेत्र का उपयोग करती हैं, अब लंबी दूरी के वैकल्पिक रास्तों का सहारा ले रही हैं।
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, सुरक्षा सर्वोपरि है। “असुरक्षित हवाई क्षेत्र के ऊपर से उड़ान भरना यात्रियों की जान जोखिम में डालना है। इसलिए, एयरलाइंस अब ओमान या मध्य एशिया के अन्य सुरक्षित रास्तों से उड़ानें संचालित कर रही हैं,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया।
यात्रियों की जेब और समय पर पड़ेगा असर
रूट बदलने का सीधा मतलब है उड़ान के समय में बढ़ोतरी। दिल्ली या मुंबई से लंदन, पेरिस और न्यूयॉर्क जाने वाली उड़ानों के समय में अब 45 मिनट से लेकर 1.5 घंटे तक का अतिरिक्त समय लग रहा है।
इस बदलाव के कई आर्थिक प्रभाव भी हैं:
ईंधन की खपत: लंबा रास्ता होने के कारण विमानों में ईंधन की खपत बढ़ गई है।
टिकट के दाम: परिचालन लागत बढ़ने से एयरलाइंस जल्द ही अंतरराष्ट्रीय टिकटों की कीमतों में 10% से 15% की बढ़ोतरी कर सकती हैं।
कनेक्टिंग फ्लाइट्स: उड़ानों में देरी के कारण कई यात्रियों की कनेक्टिंग फ्लाइट्स छूटने की खबरें भी सामने आ रही हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप और वैश्विक सुरक्षा का दृष्टिकोण
जैसा कि आप जानते हैं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने मध्य पूर्व की स्थिति पर सख्त रुख अपनाया है। अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंधों और क्षेत्र में बढ़ती सैन्य उपस्थिति ने वैश्विक एयरलाइंस को अपने रूट मैप को फिर से तैयार करने पर मजबूर कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय लगातार अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
एयरलाइंस की आधिकारिक प्रतिक्रिया
एयर इंडिया के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “हम स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और सुरक्षा एजेंसियों के परामर्श से ही उड़ानों का संचालन कर रहे हैं। यात्रियों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है।” वहीं, इंडिगो ने भी अपने यात्रियों को सलाह दी है कि वे हवाई अड्डे के लिए निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस ऑनलाइन जरूर चेक कर लें।
यह ईरान संकट न केवल भू-राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर रहा है, बल्कि वैश्विक परिवहन और व्यापार की कमर भी तोड़ रहा है। यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले हफ्तों में हवाई यात्रा और भी महंगी और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
