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दीपू चंद्र दास के परिवार के साथ खड़ा हुआ भारत

दुनियाभर से उमड़ा मदद का सैलाब; भारत, अमेरिका और सिंगापुर से भेजे जा रहे पैसे

दीपू चंद्र दास के परिवार के साथ खड़ा हुआ भारत
  • बांग्लादेश में मॉब लिंचिंग का शिकार हुए हिंदू युवक दीपू चंद्र दास के परिवार की आर्थिक मदद के लिए भारत सहित दुनिया भर से लोग आगे आए हैं।
  • दीपू परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था; अब उसकी पत्नी, छोटे बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता के लिए चंदा इकट्ठा किया जा रहा है।
  • भारत सरकार ने इस घटना को ‘वीभत्स’ बताते हुए बांग्लादेश प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

नई दिल्ली/ढाका, 23 दिसंबर: बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में ईशनिंदा के झूठे आरोपों के चलते भीड़ द्वारा मार दिए गए 25 वर्षीय हिंदू श्रमिक दीपू चंद्र दास के परिवार की मदद के लिए पूरी दुनिया से हाथ बढ़े हैं। दीपू की नृशंस हत्या के बाद उसका परिवार पूरी तरह से टूट चुका है और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इस बीच, भारत, अमेरिका, सिंगापुर और अन्य देशों से लोग स्वेच्छा से वित्तीय सहायता भेज रहे हैं ताकि उसके मासूम बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता का भविष्य सुरक्षित हो सके।

दुनियाभर से उमड़ी संवेदना और आर्थिक मदद

सोशल मीडिया पर दीपू के भाई अपू चंद्र दास के दर्दनाक बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मुहिम शुरू हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों ने परिवार के लिए एक बैंक खाता खुलवाया है, जिसमें भारत और अमेरिका के प्रवासी भारतीयों द्वारा बड़ी मात्रा में दान दिया जा रहा है। दीपू अपने परिवार में एकमात्र कमाने वाला सदस्य था, जो एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करके 8 लोगों का पेट पालता था।

भारत सरकार का कड़ा रुख और विरोध प्रदर्शन

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना पर ‘कड़ी चिंता’ व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और बांग्लादेशी अधिकारियों को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़ा संदेश भेजा गया है। दिल्ली में भी इस घटना के विरोध में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर विश्व हिंदू परिषद (VHP) और अन्य संगठनों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद वहां सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

जांच में बेगुनाह निकला दीपू

बांग्लादेश की एलीट फोर्स रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने अपनी जांच में स्पष्ट किया है कि दीपू चंद्र दास के खिलाफ लगाए गए ईशनिंदा के आरोप पूरी तरह निराधार थे। सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक पोस्ट के सबूत नहीं मिले हैं। अब तक इस मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें फैक्ट्री के कुछ अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्होंने कथित तौर पर दीपू को भीड़ के हवाले कर दिया था।

मानवीय गरिमा के लिए अंतरराष्ट्रीय अपील

अमेरिका के कई सांसदों और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के कार्यालय ने भी इस घटना की निंदा की है। न्यूयॉर्क की विधानसभा सदस्य जेनिफर राजकुमार ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। वहीं, दीपू के भाई ने मांग की है कि केवल गिरफ्तारी काफी नहीं है, बल्कि उसके भाई को जला देने वाले दरिंदों को मौत की सजा मिलनी चाहिए।

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