
शनि का नक्षत्र परिवर्तन महत्वपूर्ण बताया।जा रहा है. शनि का यह नक्षत्र परिवर्तन मेष से मीन राशि तक के लोगों को प्रभावित करेगा. इसके साथ ही देश दुनिया पर भी इसका प्रभाव देखने को मिलेगा.

शनि का श्रवण नक्षत्र में गोचरवर्तमान समय में शनि श्रवण नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं. इस नक्षत्र को बहुत ही पवित्र नक्षत्र माना गया है. श्रवण नक्षत्र का स्वामी गुरु है. गुरु को देव गुरु बृहस्पति के नाम से भी जाना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु को एक शुभ ग्रह के तौर पर देखा जाता है. ये शुभ फल प्रदान करने वाला ग्रह माना गया है. शनि अभी इसी के नक्षत्र में विराजमान हैं
शनि का नक्षत्र परिवर्तन (Shani।Nakshatra।Transit।2022)शनि देव श्रवण नक्षत्र से अब धनिष्ठा नक्षत्र में गोचर करेंगे. 18 फरवरी से शनि धनिष्ठा नक्षत्र में गोचर करने जा रहे हैं. जहां पर शनि अगले वर्ष यानि वर्ष 15 मार्च 2023 तक रहेंगे.
धनिष्ठा नक्षत्र अहंकार को मिटाने वाला नक्षत्रज्योतिष शास्त्र के अनुसार धनिष्ठा नक्षत्र । तारों का समूह, ढोल या मृदंग की आकृति का आभास देता है. दोनों वाद्य यंत्र भीतर से खोखले होते हैं, यहां खोखले का अर्थ है अहंकार न होना. तथा इनके चमड़े के बाहरी आवरण पर थाप पड़ने से ध्वनि उत्पन्न होती है. धनिष्ठा का अर्थ होता है धन संपदा से पूर्ण. इस नक्षत्र के देवता । वसुओं को माना गया है. वसु का अर्थ है -उत्कृष्ट श्रेष्ठ मणि रत्न धन वैभव समृद्धि कुबेर
मकर और कुंभ राशि को जोड़ता है धनिष्ठाधनिष्ठा नक्षत्र मकर राशि और कुंभ राशि को जोड़ने वाला नक्षत्र है, इसलिए जिन लोगों की मकर और कुंभ राशि है, उन लोगों का धनिष्ठा नक्षत्र हो सकता है. धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म लोग कला और संगीत के क्षेत्र में विशेष रुचि रखने वाले होते हैं. ये धर्म और आध्यात्मिक शक्ति से भी पूर्ण होते हैं. इन पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. ये अपनी योग्यता के अनुसार सफलता प्राप्त करते हैं. शनि का धनिष्ठा नक्षत्र गोचर कला और संगीत से जुड़े लोगों को विशेष लाभ प्रदान करेंगे. इसके साथ ही जो लोग ज्ञान और शिक्षा से जुड़े हुए हैं उन्हें भी अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे.
