
नई दिल्ली, 3 मार्च:
चंद्र ग्रहण 2026 का सटीक समय और अवधि
आज का यह ग्रहण एक ‘खंडग्रास’ यानी आंशिक चंद्र ग्रहण है। भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार इसकी महत्वपूर्ण समय सारणी इस प्रकार है:
ग्रहण का स्पर्श (शुरुआत): दोपहर 03:20 बजे
ग्रहण का मध्य समय: शाम 05:05 बजे
ग्रहण का मोक्ष (समाप्ति): शाम 06:48 बजे
कुल अवधि: लगभग 3 घंटे 27 मिनट
चूंकि ग्रहण दोपहर में शुरू हो गया है, उस समय भारत में सूर्य का प्रकाश होने के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देगा। भारत में यह ‘ग्रस्तोदय’ रूप में नजर आएगा, जिसका अर्थ है कि जब चंद्रमा उदय होगा, तब वह पहले से ही ग्रहण की अवस्था में होगा।
भारत में कहां और कितनी देर दिखेगा ग्रहण?
भारत में इस खगोलीय घटना को देखने के लिए लोगों को शाम का इंतजार करना होगा। अधिकांश भारतीय शहरों में यह नजारा केवल 20 से 25 मिनट के लिए ही दिखाई देगा।
पूर्वी भारत: असम, अरुणाचल प्रदेश और बंगाल के इलाकों में चंद्रमा जल्दी उदय होता है, इसलिए वहां ग्रहण की दृश्यता का समय थोड़ा अधिक रहेगा।
दिल्ली और उत्तर भारत: दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में शाम करीब 6:22 बजे के बाद ग्रहण दिखाई देना शुरू होगा और 6:48 बजे समाप्त हो जाएगा।
पश्चिमी भारत: गुजरात और राजस्थान के हिस्सों में दृश्यता का समय सबसे कम (लगभग 10-15 मिनट) रहने का अनुमान है।
क्या है ‘ब्लड मून’ और यह क्यों दिखता है?
इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा का रंग हल्का लाल या तांबे जैसा दिखाई दे सकता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते समय सूर्य की रोशनी बिखरती है और केवल लाल रंग की किरणें ही चंद्रमा तक पहुंच पाती हैं। यह एक दुर्लभ और सुंदर दृश्य होता है जिसे नंगी आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित है।
सूतक काल और धार्मिक मान्यताएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले ही प्रभावी हो जाता है।
सूतक का समय: आज सुबह लगभग 06:20 बजे से सूतक शुरू हो गया है, जो शाम 06:48 बजे ग्रहण की समाप्ति तक रहेगा।
क्या करें और क्या न करें: सूतक के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं। इस समय में पूजा-पाठ की जगह मानसिक जाप करना शुभ माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर दान-पुण्य करने की परंपरा है। गर्भवती महिलाओं को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
खगोलविदों का कहना है कि चंद्र ग्रहण एक विशुद्ध वैज्ञानिक घटना है। सूर्य ग्रहण के विपरीत, चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी विशेष फिल्टर या चश्मे की आवश्यकता नहीं होती। आप इसे दूरबीन (Binoculars) या टेलीस्कोप से और भी स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।
साल 2026 का यह पहला चंद्र ग्रहण आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। भले ही भारत में इसकी दृश्यता कम समय के लिए हो, लेकिन ‘ब्लड मून’ का यह अनुभव यादगार रहेगा। ग्रहण समाप्त होने के बाद आप शुद्धिकरण के लिए सामान्य दिनचर्या अपना सकते हैं।
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