
उत्तर प्रदेश में बसपा के कमजोर होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने गैर यादव ओबीसी वोटरों को अपने पाले में लाने की जमकर कोशिश की. ओबीसी राजनीति के करीब घूमती यूपी की सियासत में अपना दल आगे बढ़ी.
इस चुनाव में अनुप्रिया की पार्टी अपना दल यूपी की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी और उसने सीटों के मामले में बीएसपी और कांग्रेस को भी पछाड़ दिया है.
2 से 12 सीटों तक पहुंची अपना दल (एस)
2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपना दल-एस को दो सीटें दी थी. पार्टी ने दोनों सीटें जीतीं. इसके बाद 2017 में बीजेपी के साथ ही मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा और 11 सीटें में 9 सीटों पर जीत हासिल की. इस बार पार्टी के खाते में 17 सीटें आई और 12 सीटों पर जीत हासिल हुई. ज्यादातर कुर्मी बहुल इलाकों में बीजेपी और उसके गठबंधन के साथियों को जीत मिली. अनुप्रिया पटेल ने 70 से ज्यादा कुर्मी और ओबीसी बहुल सीटों पर भाजपा के लिए प्रचार किया.
अपना दल (एस) को इन 12 सीटों पर मीली जीत
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपना दल (एस) को कायमगंज, घाटमपुर, मऊरानीपुर, बिंदकी, बारा, छानबे, रोहनिया, मड़ियाहूं, शोहतरगढ़, नानपारा, विश्वनाथगंज, मानिकपुर में जीत मिली.
अपना दल (एस) बनी यूपी की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी
अनुप्रिया पटेल की अपना दल (एस) यूपी विधानसभा चुनाव में 12 सीट जीतने में कामयाब रही. इसी के साथ भाजपा (279 सीट) और सपा (125 सीट) के बाद तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. यूपी विधानसभा चुनाव में देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को सिर्फ 2 सीट पर ही जीत मीली. जब कि मायावती की बसपा केवल एक सीट जीतने में कामयाब रही.
