
हिंदू कैलेंडर का चौथा महीना आषाढ़ 15 जून से 13 जुलाई तक होगा। इस महीने में मौसमी बदलाव होने लगते हैं। सूर्य से ही ऋतुएँ बदलती हैं। जब भी सूर्य की चाल बदलती है तो इनकी पूजा करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है। इसलिए आषाढ़ मास में सूर्य उपासना की परंपरा है। जो इस महीने को धार्मिक और शारीरिक रूप से और भी खास बनाता है।
पुरी के ज्योतिषी डॉ. गणेश मिश्र कहते हैं कि इस महीने में भगवान विष्णु और सूर्य की पूजा करनी चाहिए। जिससे ऊर्जा को नियंत्रित किया जा सके। यह महीना गर्मी और बारिश का गोधूलि काल है। इस वजह से इन दिनों बीमारियों का संक्रमण ज्यादा होता है। इसलिए आषाढ़ के महीने में सेहत को लेकर विशेष ध्यान रखना चाहिए।
आषाढ़ के स्वामी सूर्य और वामन हैं
ज्योतिष ग्रंथों में कहा गया है कि आषाढ़ मास के देवता सूर्य और भगवान वामन हैं। इसलिए इस महीने में भगवान विष्णु और सूर्य के वामन अवतार की विशेष पूजा करनी चाहिए। इनकी पूजा से विशेष फल की प्राप्ति होती है। आषाढ़ मास में सूर्य की पूजा करने से ऊर्जा का स्तर नियंत्रित रहता है। जिससे सेहत अच्छी रहती है और किसी भी तरह की बीमारी नहीं होती है। भगवान विष्णु की पूजा से संतान और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
ग्रीष्म ऋतु और वर्षा की गोधूलि
स्वास्थ्य की दृष्टि से आषाढ़ मास में सावधानी बरतनी चाहिए। यह महीना गर्मी और बारिश के संधि काल में आता है। यानी इस दौरान गर्मी का मौसम होता है और सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में आने के कारण भी बरसात का मौसम रहता है। तो इन दिनों वातावरण में नमी और उमस बढ़ने लगती है। इसलिए इस माह में रोगों के प्रकोप अधिक होते हैं। आषाढ़ के महीने में ही मलेरिया, डेंगू और वायरल बुखार अधिक होता है। इसलिए इस माह में सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
सावधानियां: क्या करें और क्या न करें
बदलते मौसम के साथ इस महीने में पानी से संबंधित बीमारियां ज्यादा होती हैं। ऐसे में इन दिनों साफ पानी का खास ख्याल रखना चाहिए। आषाढ़ मास में रसीले फलों का सेवन अधिक करना चाहिए। हालांकि बेल से सावधान रहें। पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए तली-भुनी चीजों का सेवन कम करना चाहिए। आषाढ़ के महीने में सौंफ, हींग और नींबू का सेवन लाभकारी माना जाता है। इस महीने में साफ-सफाई पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
