

बच्चे कम उम्र में ही कुछ शब्दों का उच्चारण सीख जाते हैं वहीं कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं जो बोलने में काफी समय लेते हैं। जब बच्चे देरी से बोलना सीखते हैं तो ऐसे में माता-पिता इसको लेकर चिंतित हो जाते हैं। सामान्य रूप से एक साल के बाद बच्चे कुछ न कुछ बोलना शुरू कर देते हैं। आपको बता दें कि हर बच्चे का शारीरिक विकास अलग तरह से होता है इसलिए कुछ बच्चे समय पर बोलना सीख जाते हैं वहीं कुछ देर से बोलना शुरू करते हैं। बच्चों के देर से बोलना शुरू करने के पीछे कई कारण होते हैं
बच्चे अपनी मां के हावभाव और उनके होंठों को देखकर अपनी प्रतिक्रिया देने की कोशिश करते हैं। जब बच्चों को सामने ताली बजाकर या तेजी से उनका नाम पुकारा जाता है तो वे तुरंत उस तरफ देखने लगते हैं।
बच्चों का देर से बोलना कई समस्याओं के कारण हो सकता है। इसके पीछे जन्म, स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियां, आनुवांशिक कारण भी जिम्मेदार माने जाते हैं। बच्चों के उचित विकास के लिए यह जरूरी है कि उनकी सुनने और बोलने की क्षमता ठीक हो। ऐसे में जब बच्चे सही समय पर बोलना शुरू नहीं करते हैं तो माता-पिता इस बात को लेकर चिंतित हो जाते हैं।
बच्चों के देर से बोलने की समस्या के उपाय
बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताएं, उन्हें बोलने के लिए ट्रेन करें।
बच्चों से बार-बार बात करने की कोशिश करें।
बच्चे जो शब्द बोलें उन्हें दोहराएं।
बच्चों के सामने तेज आवाज करके किताब पढ़ें।
बच्चों को अधिक टीवी देखने न दें।7*-/]
बच्चों को कुछ चीजें रटायें और उसे दोहराने में उसकी मदद करें।
