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500 बर्ष पहले प्राचीन कालीन सोलहभुजी माता दिवड़ी मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़

झारखंड/तामाड 

तमाड़ स्थित प्राचीन कालीन सोलहभुजी माता दिवड़ी मंदिर में सोमवार को मंत्रोच्चार के साथ कलश स्थापना की गई. इस दौरान मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरी थी. माता के प्रति श्रद्धालुओं की विशेष आस्था इस बात से लगाया जा सकता है कि घंटो लाइन में लगे होने के बाद भी चेहरे पर माता दिवडी के प्रति असीम श्रद्धा और भक्ति के भाव नजर आ रहे थे. ऐसे तो देश के कई राज्यों से श्रद्धालु मंदिर में रोजाना सैकड़ों की संख्या में माता से आशीर्वाद लेने आते हैं. मगर दुर्गापूजा के कलश स्थापना के दिन अत्यधिक श्रद्धालु जुटते हैं. मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज पांडा, पंडित नरसिंह पांडा, अखिलेश पांडा ने बताया कि इस वर्ष स्थापना दिवस पर मंदिर में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ को लेकर पूजा-अर्चना के लिए विशेष तैयारी की गई है. वही मंदिर को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया है. पुजारी ने बताया की प्रथमा से नवमी पूजा सम्पन्न होने तक मंदिर में बलि प्रथा पूर्णत: बंद रहेगा वहीं श्रद्धालु नारियल भी नहीं फोड़ सकते. दिवड़ी मंदिर रांची- टाटा हाईवे-33 के किनारे होने की वजह से इसकी ख्याति दूर-दूर तक फैली है. बताया जाता है कि प्राचीन कालीन मंदिर विशुद्ध रूप से प्राकृतिक है. इस प्राकृत मंदिर का निर्माण संभवत 500 सौ वर्ष से पुरानी बताई जाती है. यह इस बात से स्पष्ट होता है कि प्राकृत मंदिर में लगे विशाल पत्थरों और तरासे गये पत्थर पर बने नक्काशी के आधार पर स्थानीय लोगों और मंदिर के पुजारियों का मानना है कि मंदिर का निर्माण असुरों के द्वारा किया गया था जो गर्भगृह में विराजमान 16 भुजाओं वाली मां दुर्गा स्वयं विराजमान हैं. बताया जाता है कि इनके दर पर जिसने भी मन वचन और कर्म के साथ हाथ फैलाया उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है. नवरात्र के दौरान यहाँ पर पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व माना जाता है. मंदिर की ख्याति तब और बढ़ी जब भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी दिवड़ी मंदिर में माता से आशीर्वाद लेने आते थे. टीम इंडिया के कप्तान बनने के बाद जब कभी भी अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने के लिए विदेश रवाना होते थे दिवड़ी मां से आशीर्वाद लेते ही हैं. इधर, श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ बढ़ने के अनुमान पर तमाड़ पुलिस की ओर सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए हैं. बताया जाता है कि सिंदरी-अड़की निवासी सह श्रद्धालु संजय गुप्ता द्वारा कलश स्थापना दिवस से दशमी तक मंदिर में समुचित व्यवस्था पर आर्थिक सहयोग प्रदान करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं।

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