

दिवाली भगवान श्री राम को समर्पित हैं। कहा जाता है की जब भगवान श्री राम ने रावण का वध किया उसके बाद वे अयोध्या लौटे अपनी पत्नी माता सीता और अपने अनुज लक्ष्मण के साथ वो भी पुरे 14 वर्षो में , तो अयोध्यावासियों ने पूरी अयोध्या में दिए जला कर उनका स्वागत किया था। उस दिन अमावस्या भी थी तो अंधरे को दूर करने के लिए भी दिए लगाए गए थे।
दिवाली का त्यौहार पुरे 5 दिन चलता हैं। धनतेरस से शुरू हो कर भाई दूज तक दिवाली को माना जाता हैं। धनतेरस के दिन हम माँ लक्ष्मी और धन्वन्तरि की पूजा करते हैं। उसके बाद नरक चौदस आती हैं जिसे कुत्तो की दिवाली कहते हैं। फिर दिवाली के दिन माँ लक्ष्मी संग गणपति और श्री हरी की भी पूजा होती है। उसके बाद गोवर्धन और अंत में भाई दूज आता हैं। सभी दिनों में हम नए नए कपड़े पहनकर ख़ुशी खुशी त्योहार मनाते हैं।
