
- बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले मुजफ्फरपुर के पूर्व सांसद अजय निषाद ने अपनी पत्नी रमा निषाद के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) में “घर वापसी” की।
- लोकसभा चुनाव 2024 में टिकट कटने के बाद अजय निषाद ने भाजपा छोड़ कांग्रेस का दामन थामा था, लेकिन अब उन्होंने फिर से कमल का हाथ पकड़ लिया है।
- निषाद समुदाय से आने वाले इस कद्दावर नेता की वापसी को उत्तर बिहार में NDA की चुनावी रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, रमा निषाद को विधानसभा टिकट मिलने की अटकलें तेज हैं।
समग्र समाचार सेवा
पटना, 11 अक्टूबर: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की गहमागहमी के बीच राजनीतिक दलों में दल-बदल का सिलसिला तेज हो गया है। इसी क्रम में, मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र से दो बार सांसद रहे अजय निषाद ने कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 को अपनी पत्नी रमा निषाद के साथ भारतीय जनता पार्टी (BJP) में वापसी कर ली। पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल की उपस्थिति में निषाद दंपति ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
अजय निषाद का यह कदम ऐसे समय में आया है जब बिहार में चुनावी माहौल जोर पकड़ रहा है। निषाद, जो अपने पिता, दिवंगत केंद्रीय मंत्री जय नारायण प्रसाद निषाद की राजनीतिक विरासत को संभालते हैं, मुजफ्फरपुर में एक प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। उन्होंने 2014 और 2019 में भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी द्वारा उनका टिकट काटे जाने के बाद, वह बागी होकर कांग्रेस में शामिल हो गए थे और मुजफ्फरपुर सीट से चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें भाजपा के डॉ. राजभूषण चौधरी निषाद से भारी अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।
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निषाद वोटों के समीकरण साधने की रणनीति
अजय निषाद की घर वापसी को राजनीतिक विश्लेषक बिहार में निषाद (EBC) समुदाय के वोटों को साधने की बीजेपी की महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में देख रहे हैं। मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में निषाद समुदाय का अच्छा-खासा प्रभाव है और अजय निषाद इस वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले एक प्रमुख नेता हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, अजय निषाद स्वयं या उनकी पत्नी रमा निषाद आगामी विधानसभा चुनाव में NDA गठबंधन की ओर से उम्मीदवार हो सकती हैं। अटकलें हैं कि मुजफ्फरपुर या वैशाली जिले की किसी सीट से उन्हें टिकट दिया जा सकता है। यह कदम न केवल पार्टी के भीतर निषाद समुदाय के प्रतिनिधित्व को मजबूत करेगा, बल्कि महागठबंधन के उन प्रयासों को भी कमजोर कर सकता है, जो इस अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के वोटों को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। बिहार की राजनीति में जातिगत समीकरणों के महत्व को देखते हुए, निषाद दंपति का भाजपा में शामिल होना निश्चित रूप से आगामी चुनाव के नतीजों पर असर डाल सकता है।
परिवार की राजनीतिक विरासत और भविष्य की भूमिका
अजय निषाद एक मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता, जय नारायण प्रसाद निषाद, न केवल मुजफ्फरपुर से तीन बार सांसद रहे थे, बल्कि केंद्र सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके थे। अजय निषाद ने खुद अपने राजनीतिक करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के टिकट पर दो विधानसभा चुनाव हारना भी शामिल है।
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मिली हार के बाद, निषाद ने यह महसूस किया कि उनकी राजनीतिक राह भाजपा के साथ ही सफल हो सकती है। अजय निषाद की वापसी से भाजपा को संगठनात्मक और चुनावी, दोनों स्तरों पर मजबूती मिलने की उम्मीद है। प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने उनका पार्टी में स्वागत करते हुए कहा कि उनके अनुभव और जनाधार से पार्टी को बिहार चुनाव में बड़ा फायदा होगा। यह घर वापसी सिर्फ एक नेता का पार्टी बदलना नहीं है, बल्कि उत्तर बिहार की राजनीति में निषाद वोट बैंक पर अपनी पकड़ मजबूत करने की बीजेपी के बड़े प्रयास का हिस्सा है।
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