
- एक कॉर्पोरेट कंपनी द्वारा कर्मचारियों को दिए गए खास दिवाली उपहार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
- उपहार की अनूठी और भावनात्मक प्रकृति ने यूज़र्स का ध्यान खींचा और ‘कॉर्पोरेट गिफ्टिंग’ को नई परिभाषा दी।
- कर्मचारियों की खुशी और कंपनी की सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने जमकर प्रतिक्रियाएँ दी हैं।
नई दिल्ली, 15 अक्टूबर: दिवाली का मौसम शुरू होते ही, कॉर्पोरेट जगत में बोनस और उपहारों का दौर शुरू हो जाता है। अमूमन, इसमें कैश बोनस, मिठाई के डिब्बे, या फिर साधारण गैजेट्स शामिल होते हैं। लेकिन इस बार एक कॉर्पोरेट कंपनी ने अपने कर्मचारियों को ऐसा तोहफा दिया कि उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। यह वीडियो केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह मानव संसाधन (HR) और कर्मचारी जुड़ाव (Employee Engagement) के दृष्टिकोण को एक नया आयाम दे रहा है।
वीडियो में दिखाया गया है कि कंपनी ने कर्मचारियों को महंगे गैजेट्स या बड़ी बोनस राशि देने के बजाय, उनके जीवन से जुड़ा कोई भावनात्मक और अनूठा उपहार दिया है। (उदाहरण के लिए: किसी कर्मचारी के माता-पिता के लिए तीर्थयात्रा का पैकेज, बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए आंशिक छात्रवृत्ति, या उनके नाम पर कोई संपत्ति-पत्र)। उपहार प्राप्त करने वाले कर्मचारियों की आँखों में आंसू और चेहरे पर अचंभे का भाव, वीडियो को बेहद दिल को छू लेने वाला बना रहा है।
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भावनात्मक जुड़ाव ने वीडियो को किया वायरल
इस वीडियो के वायरल होने का मुख्य कारण उपहार का मूल्य नहीं, बल्कि विचारशीलता और भावनात्मक जुड़ाव है। सोशल मीडिया यूज़र्स, जो अक्सर अपनी कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले नीरस और औपचारिक उपहारों से निराश होते हैं, उन्होंने इस कंपनी की पहल को ‘गेमचेंजर’ बताया है।
यूज़र्स ने टिप्पणी की है कि यह कदम दर्शाता है कि कंपनी अपने कर्मचारियों को केवल संसाधन नहीं, बल्कि अपने पारिवारिक सदस्य मानती है। यह पहल कॉर्पोरेट जगत को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है: उपहार की कीमत से ज़्यादा मायने उसके पीछे की भावना रखती है।
वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए, एक यूज़र ने लिखा, “काश मेरी कंपनी भी ऐसी होती! यह उपहार सिर्फ एक वस्तु नहीं है, यह कर्मचारी के त्याग और समर्पण की सच्ची पहचान है।” वहीं दूसरे यूज़र ने टिप्पणी की, “यह दिखाता है कि कैसे एक छोटा सा प्रयास कर्मचारी के प्रति वफादारी और उत्पादकता को बढ़ा सकता है।”
कॉर्पोरेट गिफ्टिंग का बदलता ट्रेंड
यह वायरल वीडियो भारत में कॉर्पोरेट गिफ्टिंग के बदलते रुझान को भी दर्शाता है। महामारी के बाद, कंपनियों ने महसूस किया है कि कर्मचारी केवल वेतन के लिए ही काम नहीं करते; उन्हें मान्यता, सम्मान और भावनात्मक समर्थन की भी आवश्यकता होती है।
अब कंपनियां ‘वेलनेस पैकेज’, ‘कस्टमाइज्ड अनुभव’ और ‘लाइफस्टाइल वाउचर्स’ जैसे विकल्पों को अपना रही हैं, जो सीधे कर्मचारी के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। यह नया ट्रेंड पारंपरिक ‘बोनस-और-मिठाई’ मॉडल से हटकर है और इसका सीधा संबंध कर्मचारी कल्याण से है।
HR विशेषज्ञों की राय: अनूठी पहल का महत्व
कई मानव संसाधन (HR) विशेषज्ञों ने भी इस वीडियो को साझा करते हुए इसे उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। उनका मत है कि ऐसे भावनात्मक उपहार कर्मचारियों के बीच सकारात्मक कार्य संस्कृति को बढ़ावा देते हैं।
HR सलाहकार डॉ. अंजलि शर्मा कहती हैं, “जब कंपनी कर्मचारी के व्यक्तिगत जीवन की ज़रूरतों को समझकर तोहफ़ा देती है, तो यह विश्वास का बंधन मज़बूत करता है। यह दिवाली गिफ्ट केवल एक सालाना औपचारिकता नहीं, बल्कि साल भर की वफादारी को सुनिश्चित करने का एक निवेश है।”
इस तरह के भावनात्मक जुड़ाव से कर्मचारियों की कार्यक्षमता (productivity) बढ़ती है, और वे कंपनी के लक्ष्यों के साथ खुद को ज़्यादा आसानी से जोड़ पाते हैं। इसके साथ ही, यह वीडियो कंपनी की ब्रांड इमेज को भी मज़बूत करता है, जिससे वह नौकरी चाहने वालों के बीच एक आकर्षक नियोक्ता (Employer of Choice) के रूप में उभरेगी।
दिवाली उपहार बना ब्रांडिंग का टूल
यह वायरल वीडियो साबित करता है कि दिवाली का उपहार सिर्फ एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह कंपनी के मूल्यों (Values) और ब्रांडिंग का एक शक्तिशाली टूल है। इस कंपनी ने दिखाया कि छोटे, विचारशील और भावनात्मक उपहारों का प्रभाव बड़े बोनस से कहीं अधिक हो सकता है। यह पहल अन्य कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए एक सबक है कि कर्मचारियों को खुश करने का सबसे अच्छा तरीका उनके दिल तक पहुँचना है।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो की ज़बरदस्त सकारात्मक प्रतिक्रिया दर्शाती है कि आम जनता भी कंपनियों से अधिक मानवीय और सामाजिक रूप से जागरूक होने की उम्मीद रखती है।
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