
- मैमनसिंह जिले में भीड़ ने 25 वर्षीय दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या कर दी और शव को आग के हवाले कर दिया।
- जांच में खुलासा हुआ है कि दीपू पर लगे ईशनिंदा के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और अफवाह मात्र थे।
- बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इस जघन्य अपराध की निंदा की है और अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
मैमनसिंह (बांग्लादेश), 22 दिसंबर: पड़ोसी देश बांग्लादेश से मानवता को शर्मसार करने वाली एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। मैमनसिंह जिले के भालुका इलाके में एक उन्मादी भीड़ ने हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की बेरहमी से हत्या कर दी। कट्टरपंथियों ने न केवल उसे पीट-पीटकर मार डाला, बल्कि क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए उसके शव को एक पेड़ से बांधकर सरेआम जला दिया। यह घटना 18 दिसंबर की रात को हुई, जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में तनाव व्याप्त है।
महज अफवाह ने ली मासूम की जान
दीपू चंद्र दास भालुका में एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था। रिपोर्ट्स के अनुसार, उसके एक सहकर्मी के साथ मामूली विवाद हुआ था, जिसके बाद कथित तौर पर ईशनिंदा की अफवाह फैला दी गई। देखते ही देखते फैक्ट्री के बाहर हजारों की भीड़ जमा हो गई। फैक्ट्री प्रबंधन ने दीपू को बचाने की कोशिश की और उसे एक सुरक्षा कक्ष में रखा, लेकिन हिंसक भीड़ के दबाव और पुलिस के समय पर न पहुँचने के कारण उसे भीड़ के हवाले करना पड़ा।
जांच में ईशनिंदा के कोई सबूत नहीं
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा बांग्लादेश की रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने किया है। जांच अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दीपू चंद्र दास के खिलाफ ईशनिंदा का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। न तो किसी प्रत्यक्षदर्शी ने उसे आपत्तिजनक टिप्पणी करते सुना और न ही उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर ऐसी कोई सामग्री मिली। यह पूरी तरह से एक सोची-समझी साजिश या अफवाह का नतीजा था। मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने भी सोशल मीडिया पर दीपू का एक वीडियो साझा करते हुए उसे निर्दोष बताया है।
12 आरोपी गिरफ्तार, भारत ने जताई चिंता
इस जघन्य हत्याकांड के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब तक इस मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें मुख्य संदिग्ध लिमोन सरकार और तारिक हुसैन शामिल हैं। वहीं, भारत सरकार ने भी इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है और बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
दीपू अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसके पीछे उसके बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और एक छोटा बच्चा है। स्थानीय हिंदू संगठनों ने इस हत्याकांड के विरोध में ढाका के नेशनल प्रेस क्लब के सामने प्रदर्शन किया और दोषियों के लिए फांसी की मांग की है। यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और कट्टरवाद की ओर इशारा करती है।
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