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RBI फरवरी में घटा सकता है रेपो रेट

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का अनुमान; आपकी EMI हो सकती है सस्ती

RBI फरवरी में घटा सकता है रेपो रेट
  • यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई फरवरी 2026 की एमपीसी बैठक में रेपो रेट में 0.25% (25 bps) की कटौती कर सकता है।
  • खुदरा मुद्रास्फीति (रिटेल इन्फ्लेशन) में कमी और आर्थिक विकास को गति देने की जरूरत इस फैसले का मुख्य आधार बनेगी।
  • यदि रेपो रेट घटता है, तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में गिरावट आएगी, जिससे आम आदमी को बड़ी राहत मिलेगी।

मुंबई, 22 दिसंबर: देश के मध्यम वर्ग और कर्जदारों के लिए आने वाले नए साल में एक बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) ने अपनी ताजा आर्थिक रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) फरवरी 2026 में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में नीतिगत दरों यानी रेपो रेट में कटौती का फैसला ले सकता है। यदि यह अनुमान सच साबित होता है, तो लंबे समय से ऊंची ब्याज दरों का सामना कर रहे ग्राहकों को राहत मिलेगी।

क्यों हो सकती है ब्याज दरों में कटौती?

यूनियन बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संभावित कटौती के पीछे सबसे बड़ा कारण मुद्रास्फीति (महंगाई दर) का नियंत्रण में आना है। पिछले कुछ महीनों में थोक और खुदरा महंगाई के आंकड़ों में नरमी देखी गई है। आरबीआई का लक्ष्य महंगाई को 4% के दायरे में रखना है, और मौजूदा रुझान इसी दिशा में इशारा कर रहे हैं। इसके अलावा, औद्योगिक उत्पादन और जीडीपी ग्रोथ को और अधिक रफ्तार देने के लिए बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाना जरूरी है, जो केवल ब्याज दरें घटाकर ही संभव है।

आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?

रेपो रेट वह दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक अन्य वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है। जब रेपो रेट घटता है, तो बैंकों के लिए फंड जुटाना सस्ता हो जाता है। इसका सीधा लाभ बैंक अपने ग्राहकों को देते हैं।

सस्ती होगी EMI: आपके मौजूदा होम लोन या कार लोन की मासिक किस्त (EMI) में कमी आएगी।

नए लोन होंगे सस्ते: घर खरीदने या गाड़ी लेने की योजना बना रहे लोगों को कम ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध होगा।

रियल एस्टेट में तेजी: होम लोन सस्ता होने से घरों की मांग बढ़ेगी, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट मिलेगा।

क्या कहते हैं आर्थिक विशेषज्ञ?

यूनियन बैंक के अलावा कई अन्य अर्थशास्त्रियों का भी मानना है कि अब ‘हॉकिश’ (कठोर) मौद्रिक नीति से ‘न्यूट्रल’ या ‘अकोमोडेटिव’ रुख अपनाने का समय आ गया है। हालांकि, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने हमेशा वैश्विक अनिश्चितताओं और खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर सतर्क रहने की बात कही है। विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी की बैठक से पहले आने वाले दिसंबर और जनवरी के महंगाई के आंकड़े यह तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे कि कटौती 25 बेसिस पॉइंट की होगी या आरबीआई कुछ और समय के लिए ‘इंतजार करो और देखो’ की नीति अपनाएगा।

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर भी पड़ेगा प्रभाव

एक तरफ जहाँ कर्जदारों के लिए यह अच्छी खबर है, वहीं एफडी (Fixed Deposit) में निवेश करने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। रेपो रेट में कटौती के साथ बैंक अपनी जमा योजनाओं (Deposit Rates) पर दी जाने वाली ब्याज दरों में भी कमी कर सकते हैं। इसलिए, सुरक्षित निवेश चाहने वालों के लिए मौजूदा ऊंची दरों पर लंबी अवधि की एफडी बुक करने का यह सही समय हो सकता है।

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