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Kaal Bhairav Jayanti : काल भरैव जयंती कब है? बाबा की कृपा पाना चाहते हैं, तो इस दिन कर लें ये काम

Kaal Bhairav Jayanti : शिव के दूसरे रूप, कालभैरव की मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन जयन्ती की अपनी विशेषता है. ये अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

Kaal Bhairav Jayanti : कालभैरव की पूजा करने से लौकिक-परलौकिक जितने भी बाधाएं होती हैं टल जाती हैं. कालभैरव महाराज की पूजा करने से मनोकामनाएं तो पूर्ण होती ही हैं वहीं ये भी माना जाता है कि इससे भक्त की उम्र भी बढ़ती है. जब व्यक्ति स्वयं को परेशानियों से घिरा पाता है और हर जतन असफल होने लगता है, ऐसे में कालभैरव की पूजा बहुत ही लाभकारी बताई गई है.
शिवपुराण में श्रीशिव के कई अवतारों का वर्णन मिलता है, इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. वैसे धर्म गन्थों में इनके उन्नीस अवतारों की जानकारी मिलती है, इन्हीं में एक काल भैरव का रूप विशेष है. शिवपुराण की शतरूद्र संहिता के मुताबिक श्रीशिव ने मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को इसी रूप में अवतार लिया था. इस बार यह तिथि बुधवार 16 नवम्बर 2022 को है.
भगवान शिव का रौद्र है ‘काल भरैव’
शिव का विश्वेश्वर स्वरूप अत्यन्त सौम्य, शांत है. वहीं उनका काल भैरव रूप अत्यन्त रौद्र, भयानक, विकराल तथा प्रचण्ड है. इसी रूप ने प्रजापिता श्री ब्रह्मा का गर्व का मर्दन किया और अपनी अंगुली के नाखून से इनके पांचवे सिर को काट दिया था. तब भैरव ब्रह्महत्या के पाप से दोषी हो गए. इन्हें काशी तीर्थ में ब्रह्महत्या से मुक्ति मिली. कालभैरव काशी के कोतवाल (नगर रक्षक) हैं तथा काशी में इनकी पूजा का अधिक महत्व है.
कालभैरव की पूजा कब करें?
काशी में इनके बटुक भैरव, काल भैरव, आनन्द भैरव आदि के कई मंदिर हैं. भैरव का जन्म दोपहर में हुआ था, इसलिए मध्याह्मव्यापिनी अष्टमी लेनी चाहिये. इस दिन प्रातः काल उठकर नित्यकर्म तथा स्नान से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प करना चाहिये और भैरव के मंदिर में जाकर वाहन सहित उनकी पूजा करनी चाहिये.
ऊँ भैरवाय नमः‘* इस नाम मंत्र से षोडशोपचार पूर्वक पूजन करना चाहिये. 
काल भैरव जयंती पर करें ये उपाय
भैरव का वाहन कुत्ता है, इसका मतलब इस दिन कुत्तों को मिठाईया खिलानी चाहिये. इस दिन उपवास कर भगवान् काल भेरव के समीप जागरण करने से इंसान सभी पापों से मुक्त हो जाता है. हालांकि इस बार बुधवार को यह पर्व आ रहा है लेकिन अगर भैरवाष्टमी यदि मंगलवार या रविवार को पड़े तो उसको महत्व कई गुना बढ़ जाता है. इनकी पूजा से हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती हैं. इस दिन गंगा में स्नान, पितरों का तर्पण, श्राद्ध करने के बाद इनकी पूजा करने से साल भर के लिए लौकिक-परलौकिक विघ्न टल जाते हैं और साधक की आयु में वृद्धि होना भी सम्भव है.

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