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पीएम मोदी की मन की बात समझे पुतिन, यूक्रेन पर परमाणु हमले का प्लान छोड़ दिया

अमेरिका ने यूक्रेन मुद्दे पर भारत की कूटनीतिक रणनीति की सराहना की है। सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) के प्रमुख बिल बर्न्स ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों ने रूस के फैसलों को प्रभावित किया है। बर्न्‍स के मुताबिक, पीएम मोदी परमाणु हथियारों के इस्‍तेमाल को लेकर बार-बार चिंता जाहिर कर चुके हैं। मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बातचीत रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का मन बदलने में कामयाब रही। बर्न्स ने कहा, ‘मुझे लगता है कि शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई। मेरी राय में, इसने रूसियों को प्रभावित किया।’

 

उन्होंने यह भी कहा कि आज इस बात के कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं कि रूस यूक्रेन युद्ध के दौरान परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। यूक्रेन युद्ध में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खिलाफ भारत ने बार-बार आवाज उठाई है। इसमें दोनों पक्षों से बातचीत और कूटनीति के लिए तनाव खत्म करने की अपील की गई है।

मोदी ने पुतिन से बातचीत में बार-बार युद्ध खत्म करने की अपील की थी। सीआईए प्रमुख का बयान मोदी के नेतृत्व में विदेशों में भारत की बढ़ती विश्वसनीयता की पुष्टि करता है। भारत वैश्विक मंच पर एक प्रमुख वार्ता शक्ति के रूप में उभर रहा है।

अमेरिका ने पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन संकट पर प्रधानमंत्री मोदी के रुख का बार-बार स्वागत किया है। दो दिन पहले अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा था, ‘हम पीएम मोदी के शब्दों को ज्यों का त्यों लेंगे और उनकी टीप्पणी का स्वागत करेंगे।’ भारत द्वारा रूस से तेल खरीद को लेकर पश्चिमी देशों की नाराजगी के बीच अमेरिका के इस तरह के बयान आ रहे हैं। अपने हितों को ध्यान में रखते हुए, भारत ने यूक्रेन विवाद में किसी का पक्ष नहीं लिया।

पहले कोविड, फिर यूक्रेन संघर्ष के दौरान मोदी और पुतिन के बीच लगातार बातचीत होती रही है। दोनों नेताओं के बीच आखिरी बातचीत 16 दिसंबर 2022 को हुई थी। इसमें मोदी ने एक बार फिर पुतिन से कहा कि संवाद और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। दोनों नेताओं के बीच टेलीफोन पर बातचीत ऐसे समय में हुई जब यह खुलासा हुआ कि मोदी इस साल वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए मास्को की यात्रा नहीं करेंगे। पुतिन पिछले साल इसी समिट के लिए भारत आए थे। इससे पहले समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में मोदी ने पुतिन से कहा था कि आज का युग युद्ध का नहीं है।

भारत को इसी महीने जी-20 की अध्यक्षता मिलती है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत के लिए सुनहरा मौका बताया। 19 विश्व शक्तियों और यूरोपीय संघ (ईयू) का यह समूह भारत को वैश्विक कूटनीति में अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद करेगा। भारत ने हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की है। दुनिया में आर्थिक मंदी के बावजूद भारत अपनी अर्थव्यवस्था को इससे बाहर रखने में कामयाब रहा है। यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।

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