
- नवी मुंबई के सेंचुरीयन मॉल में मुंबई सुंडी समाज का रजत जयंती (25वां) स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया।
- रांची रिम्स के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अशोक प्रसाद और कांग्रेस नेता अशोक गुप्ता विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
- झारखंडी एकता संघ के पदाधिकारियों ने प्रवासियों की एकजुटता और समाज सेवा के संकल्प को दोहराया।
नवी मुंबई, 22 दिसंबर: महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी के करीब नवी मुंबई स्थित सेंचुरीयन मॉल (Centurion Mall) रविवार, 21 दिसंबर 2025 को एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना। अवसर था मुंबई सुंडी समाज के 25वें स्थापना दिवस समारोह का। इस भव्य आयोजन में न केवल मुंबई और आसपास के क्षेत्रों के लोग जुटे, बल्कि झारखंड से आए दिग्गज समाजसेवियों और राजनेताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
झारखंड के दिग्गजों की रही गरिमामयी उपस्थिति
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में रांची रिम्स (RIMS) के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अशोक प्रसाद और प्रमुख कांग्रेस नेता अशोक गुप्ता शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान झारखंड की माटी से जुड़ी संस्कृति और सामाजिक सरोकारों पर चर्चा हुई। डॉ. अशोक प्रसाद ने अपने संबोधन में प्रवासी समाज की ताकत को सराहा और समाज के प्रति उनके योगदान की प्रशंसा की।
झारखंडी एकता संघ के कार्यों की गूंज
इस कार्यक्रम के दौरान ‘झारखंडी एकता संघ’ की चर्चा केंद्र में रही। डॉ. अशोक प्रसाद ने मंच से कहा, “मैं झारखंडी एकता संघ के सेवा कार्यों से भली-भांति परिचित हूँ। हमारे झारखंड से आए भाइयों ने पिछले 20-25 वर्षों से मुंबई की धरती पर कड़ी मेहनत की है। इस मेहनत से जो संगठन और समाज खड़ा हुआ है, वह वाकई सराहनीय है।” उनके इन शब्दों ने वहां मौजूद सभी पदाधिकारियों और सदस्यों में नया उत्साह भर दिया।
पदाधिकारियों ने व्यक्त किया आभार
झारखंडी एकता संघ के राष्ट्रीय सचिव विनोद प्रसाद और विजय कुमार के नेतृत्व में संघ के पदाधिकारियों ने झारखंड से आए मेहमानों का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनका आभार व्यक्त किया। आयोजन को सफल बनाने में नासिक से विजय प्रसाद, नालासोपारा से कन्हैयालाल साहू, सानपाड़ा से कैलाश मंडल, उदय कुमार, बेलापुर से राजकुमार महतो, सियाराम प्रसाद, कलेश्वर प्रसाद और राहुल कुमार जैसे वरिष्ठ पदाधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एकजुटता और सेवा का संकल्प
स्थापना दिवस के इस मंच से वक्ताओं ने कहा कि झारखंडी एकता संघ का उद्देश्य केवल एक समुदाय को जोड़ना नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के अलग-अलग कोनों (जैसे नासिक, नालासोपारा, बेलापुर) में रह रहे झारखंडी भाइयों को एक परिवार के रूप में संगठित करना है। पिछले ढाई दशकों में संगठन ने शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन स्थितियों में अपने लोगों की बढ़-चढ़कर मदद की है। कार्यक्रम के अंत में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने झारखंड की समृद्ध विरासत की यादें ताजा कर दीं।
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