
- गोरखपुर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काफिले के सामने अचानक एक सांड आ गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई।
- सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए जानवर के काफिले में घुसने को इंटेलिजेंस और स्थानीय पुलिस की बड़ी विफलता माना जा रहा है।
- सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना का वीडियो साझा करते हुए भाजपा सरकार की ‘आवारा पशु’ नीति पर सवाल उठाए हैं।
गोरखपुर, 22 दिसंबर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में एक बड़ी सुरक्षा चूक का मामला सामने आया है। रविवार को जब मुख्यमंत्री का काफिला शहर के एक व्यस्त इलाके से गुजर रहा था, तभी अचानक एक बेसहारा सांड सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए वाहनों के बीच आ गया। इस घटना के बाद सुरक्षाकर्मियों में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में वाहनों की गति धीमी करनी पड़ी। गनीमत रही कि कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई और सांड को तुरंत रास्ते से हटा दिया गया।
कैसे हुई इतनी बड़ी सुरक्षा चूक?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, जिसमें एनएसजी कमांडो और यूपी पुलिस के चुनिंदा जवान शामिल होते हैं। मुख्यमंत्री के मूवमेंट से पहले पूरे रूट को ‘सेनेटाइज’ किया जाता है और हर चौराहे पर पुलिस बल तैनात रहता है। इसके बावजूद, एक जानवर का काफिले के इतना करीब आ जाना जिला प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, सड़क के किनारे खड़े आवारा पशुओं को हटाने में ढिलाई बरती गई थी।
अखिलेश यादव का तीखा हमला
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए योगी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं की समस्या अब इतनी गंभीर हो गई है कि खुद मुख्यमंत्री की सुरक्षा भी खतरे में है। अखिलेश ने कहा, “जब प्रदेश के मुखिया के काफिले में सांड घुस सकता है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।” उन्होंने भाजपा सरकार की ‘गौ-शाला’ योजनाओं की विफलता को भी इस घटना से जोड़ा।
प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के आदेश
घटना के तुरंत बाद गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है। रूट ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा में चूक के जिम्मेदार कुछ अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। मुख्यमंत्री के दौरे के समय आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए नगर निगम की टीमें तैनात रहती हैं, लेकिन इस घटना ने उनके दावों की पोल खोल दी है।
आवारा पशुओं की समस्या और राजनीति
उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं का मुद्दा पिछले कई चुनावों में चर्चा का केंद्र रहा है। विपक्षी दल लगातार आवारा सांडों द्वारा किसानों की फसल बर्बाद करने और सड़क हादसों का मुद्दा उठाते रहे हैं। अब मुख्यमंत्री की सुरक्षा से जुड़े इस वाकये ने विपक्ष को एक और बड़ा हथियार दे दिया है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड कर रहा है, जहाँ लोग सुरक्षा प्रबंधों और पशु प्रबंधन पर सवाल उठा रहे हैं।
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