
नई दिल्ली: इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (ICSI) ने भारत सरकार द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026 का गर्मजोशी से स्वागत किया है। संस्थान ने समावेशी विकास, व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) और विश्वास-आधारित शासन पर सरकार के निरंतर ध्यान की सराहना की है। यह बजट भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मानव पूंजी और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर ध्यान
ICSI के अनुसार, बजट 2026 एक संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है। इसमें शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण और नवाचार के माध्यम से मानव पूंजी को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। नियामक सुधारों में तेजी लाकर व्यावसायिक वातावरण को बेहतर बनाने और स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करने के कदम दूरदर्शी हैं।
अनुपालन को सरल बनाने की पहल
बजट में अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने, मामूली प्रक्रियात्मक चूक को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और TDS/TCS दरों के युक्तिकरण की घोषणा की गई है। ICSI का मानना है कि तेजी से कॉर्पोरेट पुनर्गठन को सक्षम करने वाले ये उपाय पारदर्शिता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करते हैं। इससे न केवल बड़े उद्योगों को बल्कि छोटे व्यवसायों को भी राहत मिलेगी।
‘कॉर्पोरेट मित्र’: MSMEs के लिए एक गेम-चेंजर
ICSI ने विशेष रूप से ‘कॉर्पोरेट मित्र’ विकसित करने के सरकार के प्रस्ताव की सराहना की है। इसके तहत ICSI और अन्य पेशेवर निकाय लघु अवधि के पाठ्यक्रम डिजाइन करेंगे। ये ‘कॉर्पोरेट मित्र’ MSMEs को किफायती लागत पर अनुपालन आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेंगे।
संस्थान का मानना है कि यह पहल जमीनी स्तर पर नवाचार, रोजगार सृजन और उद्यमिता को बढ़ावा देगी। ICSI इस पहल के माध्यम से शासन को मजबूत करने और उद्यमी क्षमता बढ़ाने के लिए एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाने को तैयार है।
ICSI अध्यक्ष का वक्तव्य
बजट की सराहना करते हुए ICSI के अध्यक्ष, सीएस पवन जी. चांडक ने कहा, “केंद्रीय बजट 2026 भारत की मजबूत विकास यात्रा में विश्वास को पुख्ता करता है। ‘कॉर्पोरेट मित्र’ विकसित करने में ICSI को भागीदार के रूप में मान्यता देना एक स्वागत योग्य कदम है। ICSI विचार नेतृत्व (Thought Leadership) और क्षमता निर्माण के माध्यम से सरकार के एजेंडे को अटूट समर्थन देने का आश्वासन देता है।”
बजट 2026 में किए गए प्रावधान न केवल कॉर्पोरेट जगत को मजबूती प्रदान करेंगे, बल्कि एक लचीला और समावेशी आर्थिक ढांचा तैयार करने में भी सहायक होंगे।
