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यूपी चुनाव 2022: कुंदरकी विधानसभा में 700 ग्रामीण नहीं कर सके वोट, बीएलओ पर लगा सूची से नाम हटाने का आरोप

प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ तौर पर किसी का वोट (यूपी वोटिंग) काटने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि अगर कोई गलती हुई है तो जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.


मुरादाबाद की कुंदरकी विधानसभा के सिरस खेड़ा गांव के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वोट काटे जा रहे हैं. 
उत्तर प्रदेश में आज दूसरे चरण का विधानसभा चुनाव हो रहा है. 9 जिलों की 55 सीटों पर सुबह से वोटिंग हो रही है. मुरादाबाद भी मतदान वाले जिलों में शामिल है. मुरादाबाद की 6 विधानसभा सीटों पर सुबह 7 बजे से वोटिंग हो रही है. सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए हर मतदान स्थल पर पुलिस (यूपी पुलिस) बल तैनात किया गया है, ताकि बिना किसी असुविधा के मतदान संपन्न हो सके. इस बीच मुरादाबाद की कुंदरकी विधानसभा 29 के सिरस खेड़ा गांव में ग्रामीणों ने बड़ा आरोप लगाया है. ग्रामीणों का आरोप है कि बीएलओ और ग्राम प्रधान की मिलीभगत से 700 लोग मतदान से वंचित हो गए हैं.

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान और बीएलओ ने मिलकर वोट काटा है. इतना ही नहीं ग्रामीणों का कहना है कि एक जीवित व्यक्ति को मृत घोषित करने के बाद भी उसका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है. इस मामले में जब बीएलओ से बात की गई तो उनका कहना है कि उनकी तरफ से किसी का वोट नहीं काटा गया है. उन्होंने कहा कि इस मामले की भी जांच की जा सकती है। बीएलओ ने कहा कि जांच में अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए.

700 से ज्यादा ग्रामीणों का बड़ा आरोप
वहीं, वोट काटने की बात पर वर्तमान ग्राम प्रधान का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्हें अभी इस बारे में पता चला है, मामले में जानकारी जुटाई जा रही है। दरअसल, मुरादाबाद जिले में 700 से ज्यादा ग्रामीणों के नाम मतदाता सूची से गायब हैं. इस पर उनका गुस्सा फूट पड़ा। मतदाता सूची में नाम नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं. अधिकारियों को जैसे ही इस मामले की जानकारी हुई, उन्होंने मामले का संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए.

मतदाता सूची से नाम हटाने का आरोप
इस मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों ने किसी का भी वोट काटने से साफ इनकार कर दिया. उनका कहना है कि अगर कोई गलती हुई है तो जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. अब प्रशासन जो भी दलील दे रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि उनकी लापरवाही के कारण करीब 700 लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित हो गए हैं. ये लोग लोकतंत्र के इस महान पर्व का हिस्सा नहीं बन सके।

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