

जीवन एक चक्र है
कभी उसमे उतर है
तो कभी इसमें चढ़ाव है
इस जीवन चक्र को भी कहते है
सुख दुख का भी चक्र है
पर ऐसा कई बार होता है की लोगों को जब दुख की घड़ी आती है तो वह हमेशा टूट जाते है। और अपना लक्ष्य को न प्राप्त हो सके ऐसा मान कर बैठ जाते है। पर ऐसा नहीं होता।
एक बात सोचिए। एक छोटा सा बच्चा है जब वह चलना सीखता है तो वह भी कितनी बार गिरता है। कितनी बार उसे भी चोट लगती है। पर क्या वह चलना सीखना छोड़ देता है? नही ना
तो फिर हम तो उससे बड़े है। हम क्यों अपना हौसला को बैठते है? हमारा क्यों अपने आप पर विश्वास अडिग नही रहता? क्यों हमारे कदम हमारे लक्ष्य से डगमगा जाते है?
जब भी हमारे कदम डगमगाए तो हम एक छोटे से बच्चे को याद कर लेना चाहिए और जीवन में अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दृढ़ता बना लेना चाहिए।
