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धर्मं / ज्योतिष

असली रुद्राक्ष की पेहचान कैसे करें। मार्केट में पहचानना बहुत मुश्किल।

रुद्राक्ष को तुलसी की माला की तरह की पवित्र माना जाता है। इसलिए इसे धारण करने के बाद मांस-मदिरा से दूरी बना लेना चाहिए। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि रुद्राक्ष को कभी भी श्मशान घाट पर नहीं ले जाना चाहिए। इसके अलावा नवजात के जन्म के दौरान या जहां नवजात शिशु का जन्म होता है वहां भी रुद्राक्ष ले जाने से बचना चाहिए

असली रुद्राक्ष:


असली रुद्राक्ष को सरसों के तेल में डुबाने से वह रंग नहीं छोड़ता है जबकि नकली रुद्राक्ष रंग छोड़ देता है। – असली रुद्राक्ष पानी में डुबाने पर वह डूब जाता है , जबकि नकली रुद्राक्ष तैरता रहता है। -असली रुद्राक्ष को पहचाने के लिए उसे किसी नुकिली चीज से कुरेदने पर अगर उसमें से रेशा निकलता हो तो वह असली रुद्राक्ष होता है।

केवल अर्धचंद्राकार एक मुखी रुद्राक्ष की उत्पत्ति दक्षिण भारत में हुई है। इसमें कोई प्राकृतिक छिद्र भी नहीं है। रुद्राक्ष या एलियोकार्पस गैनिट्रस एक बड़ा सदाबहार चौड़ा-चौड़ा पेड़ है, जिसका बीज हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म में प्रार्थना मोतियों के लिए उपयोग किया जाता है। संस्कृत में रुद्राक्ष का अर्थ है रुद्र के आंसू की बूँदें।

दोमुखी रुद्राक्ष अर्धनारीश्वर का स्वरुप होता है, इसे धारण करने से मां पार्वती और शिव दोनों का आशीर्वाद मिलता है और वैवाहिक जीवन में सुख प्राप्ति के लिये दोमुखी रूद्राक्ष बहुत अच्छा माना जाता है। तीनमुखी रुद्राक्ष धारण करने पर अग्निदेव सदा प्रसन्न रहते हैं।

हर रोज रात को सोने से पहले रुद्राक्ष को उतारकर तकिए की नीचे रख लें. इससे मन शांत रहता है, बुरे सपने नहीं आते हैं और अच्‍छी नींद आती है. – शवयात्रा में भी रुद्राक्ष पहनकर नहीं जाना चाहिए. ऐसा करने से रुद्राक्ष अशुद्ध हो जाता है और यह आपके जीवन पर बुरा असर डाल सकता है.

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