

झारखंड प्रशासनिक सेवा की अधिकारी व तत्कालीन बीडीओ पोटका, पूर्वी सिंहभूम पर कार्रवाई की गयी है. उनकी तीन वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकने का आदेश दिया है. मनरेगा योजना का पर्यवेक्षण नहीं किए जाने का मुख्य आरोप था, जिस वजह से 9.06 लाख के फर्जी निकासी संभव हो गया. यानि बड़े पैमाने पर मनरेगा योजना में गड़बड़ी की गयी, बिना काम के राशि की निकासी की गयी और बीडीओ सारी चीजों पर आंखे मुंदे रही. पूरा मामला जब पकड़ में आया तो तत्कालीन उपायुक्त ने जांच कर प्रपत्र ‘क’ गठित किया और राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट भेजी.
कार्मिक विभाग ने पूरे मामले पर जांच की और यह पाया कि उनकी लापरवाही इसमें रही. राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पायल राज पर विभागीय कार्यवाही चलाने का फैसला लिया था. जांच में सारी स्थिति स्पष्ट होने के बाद यह कार्रवाई की गयी है. विभाग का मानना है कि अगर पायल राज ने समय पर योजना का निरीक्षण कर लिया होता तो यह फर्जी निकासी नहीं होती. कार्मिक विभाग ने कहा कि मनरेगा एक्ट के अनुसार जिला कार्यक्रम समन्वयक और जिले के सभी कार्यान्वयन अभिकरण किसी स्कीम की कार्यान्वयन के प्रयोजन के लिए उनके व्ययन पर रखे गये निधि के उचित उपयोग और प्रबंध के लिए उत्तरदायी होंगे. इसी के तहत बीडीओ पर कार्रवाई की गयी है. पूरा मामला 2015-16 का है.
यह गड़बड़ी पायी गयी
ग्रामीण विकास विभाग के उप सचिव ने मनरेगा योजना की जांच के लिए स्थल निरीक्षण किया था. योजना संख्या 3-11-12 में सड़क की लंबाई मात्र 150 फीट पाया गया, जबकि स्वीकृत सड़क की लंबाई 1 किमी थी. बिना कार्य किये योजना की प्राक्कलित राशि 3.024 लाख रुपये के विरूद्ध 3.02 लाख रुपये की निकासी की गयी. इसमें मुखिया हपना माहली एवं पंचायत सेवक भागीदार रहे. जिसमें मनरेगा योजना संख्या 4-11-12 में बिना कार्य कराये योजना की प्राक्कलित राशि 3,024 लाख रुपये के विरूद्ध 3.01 लाख रुपये की निकासी कलिकापुर ग्राम पंचायत के मुखिया हपना माहली एवं पंचायत सेवक आनंद सरदार द्वारा चेक के माध्यम से कर लिया गया. योजना संख्या 4-11-12 में भी बिना कार्य कराये कलिकापुर मुखिया के द्वारा 3.02 लाख रुपये की राशि की निकासी की गयी. योजना संख्या 5.11.12 में भी 3.02 लाख रुपये की निकास की गयी. इस पूरे मामले में मुखिया व पंचायत सेवक पर भी कार्रवाई हुई है.
