
- भारत और न्यूज़ीलैंड ने रिकॉर्ड 9 महीनों में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ता पूरी की।
- न्यूज़ीलैंड भारत में अगले 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर (लगभग ₹1.6 लाख करोड़) का निवेश करेगा।
- भारतीय डेयरी क्षेत्र को ‘रेड लाइन’ मानकर समझौते से बाहर रखा गया है ताकि स्थानीय किसानों के हित सुरक्षित रहें।
नई दिल्ली, 22 दिसंबर: भारत और न्यूज़ीलैंड के आर्थिक संबंधों में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने टेलीफोन पर बातचीत के दौरान ‘भारत-न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते’ (FTA) के सफल समापन की घोषणा की। मार्च 2025 में शुरू हुई यह वार्ता मात्र नौ महीनों के रिकॉर्ड समय में पूरी कर ली गई, जो दोनों देशों के बीच मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति को दर्शाती है।
भारतीय निर्यातकों के लिए ‘जीरो ड्यूटी’ का तोहफा
इस समझौते के तहत न्यूज़ीलैंड ने भारत के 100% निर्यात उत्पादों पर सीमा शुल्क (Customs Duty) खत्म करने पर सहमति जताई है। इसका सीधा फायदा भारत के कपड़ा (Textiles), चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और फार्मास्युटिकल क्षेत्रों को मिलेगा। भारतीय उत्पाद अब न्यूज़ीलैंड के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे, जिससे द्विपक्षीय व्यापार को अगले पांच वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
डेयरी क्षेत्र सुरक्षित, किसानों के हितों की रक्षा
भारतीय किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए, सरकार ने डेयरी क्षेत्र को इस समझौते से पूरी तरह बाहर रखा है। न्यूज़ीलैंड दुनिया का बड़ा डेयरी निर्यातक है, लेकिन भारत ने स्पष्ट किया कि करोड़ों छोटे डेयरी किसानों की आजीविका पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। हालांकि, सेब, कीवी और शहद जैसे कृषि उत्पादों के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाए जाएंगे, जिससे भारतीय किसानों को आधुनिक तकनीक और बेहतर उत्पादकता का लाभ मिलेगा।
युवाओं और प्रोफेशनल्स के लिए नए अवसर
समझौते में ‘टैलेंट मोबिलिटी’ पर विशेष ध्यान दिया गया है। भारतीय छात्रों को अब न्यूज़ीलैंड में पढ़ाई के बाद 3 से 4 साल तक का वर्क वीजा मिल सकेगा। इसके अलावा, कुशल पेशेवरों के लिए 5,000 ‘टेम्परेरी एम्प्लॉयमेंट एंट्री वीजा’ का कोटा तय किया गया है। इसमें आयुष चिकित्सक, योग प्रशिक्षक, भारतीय शेफ और संगीत शिक्षकों के लिए विशेष प्रावधान हैं, जिससे भारतीय प्रतिभाओं को वैश्विक मंच मिलेगा।
निवेश और भविष्य की रणनीति
समझौते के अनुसार, न्यूज़ीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा। यह निवेश मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे, तकनीक और नवाचार के क्षेत्रों में होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर एक बड़ा कदम बताया है। ओमान, ब्रिटेन और यूएई के बाद, यह हाल के वर्षों में भारत का सातवां महत्वपूर्ण व्यापार समझौता है।
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