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पॉलीथिन, गाय-भैंस चराने पर जेल की सजा! मोदी सरकार ले रही है बड़ा फैसला

नरेंद्र मोदी सरकार उन सभी कानूनों को निरस्त कर देगी जो अंग्रेजों के समय से चले आ रहे हैं, जो अब प्रचलन में नहीं हैं और जिनकी आज के समय में कोई प्रासंगिकता नहीं है। सरकार ने लोकसभा में जन विश्वास विधेयक पेश किया, जिसमें वर्तमान में इसे न्यायसंगत बनाने वाले 42 कानूनों में सजा का प्रावधान है। चीन पर बहस की मांग को लेकर विपक्ष के हंगामे के बीच एक विधेयक पेश किया गया, लेकिन नेता पीयूष गोयल की सिफारिश पर इसे एक संयुक्त समिति के पास भेजा गया है। 31 सदस्यीय समिति अब इन प्रावधानों की समीक्षा करेगी और बजट 2023 के भाग 2 में अपनी रिपोर्ट देगी।

जब कोई पत्र बिना भुगतान या टिकट के लिखा जाता है तो उसे कोरा पत्र कहा जाता है। इन पत्रों की लागत प्राप्तकर्ता द्वारा वहन की जाती थी और यदि वह भुगतान नहीं करता था, तो उस पर जुर्माना लगाया जाता था। इंडियन पोस्ट ऑफिस एक्ट, 1889 के अनुसार कोरा पत्र भेजने पर 2 साल की कैद की सजा हो सकती थी, लेकिन जन विश्वास बिल में इसे ख़तम करने का प्रावधान है।

वन विभाग की जमीन पर गाय, भैंस या अन्य कोई जानवर चराने पर सजा का भी प्रावधान है। भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत अगर आपका पालतू जानवर जंगल में भटक कर चरता है तो आपको 6 महीने की सजा हो सकती है, लेकिन लोकसभा में पेश बिल के मुताबिक सरकार इस कानून में जेल के बजाय 500 रुपये के जुर्माने के प्रावधान में बदलाव करने जा रही है। ।

जन विश्वास बिल की मदद से आईटी एक्ट की धारा 66ए को हटाया जाएगा। इसे सुप्रीम कोर्ट पहले ही हटा चुका है। 2015 में, सुप्रीम कोर्ट ने माना कि आईटी अधिनियम की धारा 66ए संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के खिलाफ है। इस धारा के तहत सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक या भड़काऊ पोस्ट करने पर गिरफ्तारी का प्रावधान था, जिसे 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अब आईटी एक्ट की धारा 66ए के तहत कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।

कैंटोनमेंट अधिनियम 2006 के अनुसार, गैर-बायोडिग्रेडेबल पॉलीथिन का उपयोग करने वाले व्यक्ति को 6 महीने तक की जेल हो सकती है, लेकिन जन विश्वास विधेयक इस प्रावधान को भी खत्म करने का प्रस्ताव करता है।

रेलवे अधिनियम 1989 में रेलवे स्टेशनों या ट्रेन के डिब्बों में भीख मांगने पर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन जन विश्वास बिल कहता है कि किसी भी व्यक्ति को किसी कोच या रेलवे के किसी हिस्से में भीख मांगने की इजाजत नहीं है। यानी सजा के प्रावधान को हटाने का प्रस्ताव किया गया है।

चाय अधिनियम 1953 के अनुसार सरकार चाय की अवैध खेती पर जुर्माना लगा सकती है। इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति बिना सरकार की इजाजत के चाय की खेती करता है तो उसे जेल भी हो सकती है। अब नए बिल में इस सजा को हटाने का प्रावधान है।

विधिक माप विज्ञान अधिनियम 2009 के अन्तर्गत किसी भी व्यक्ति द्वारा माप विज्ञान के नियंत्रक या निदेशक को झूठी सूचना देना दण्डनीय अपराध है। लेकिन जन विश्वास विधेयक में कड़े प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव है। यानी इस तरह के आरोपी जुर्माना भरने के बाद छूट सकते हैं।

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