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मनरेगा से गांधी का नाम हटाना ‘महात्मा की दूसरी हत्या’

पी. चिदंबरम का केंद्र पर तीखा हमला; नए 'जी राम जी' विधेयक को बताया धोखा

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  • वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत जी राम जी’ करने को महात्मा गांधी की स्मृति मिटाने वाला कदम बताया।
  • उन्होंने कहा कि गांधी जी की पहली हत्या 1948 में हुई थी और अब सरकार उनके नाम को योजनाओं से हटाकर उनकी दूसरी हत्या कर रही है।
  • नए कानून के तहत ग्रामीण रोजगार की ‘कानूनी गारंटी’ को खत्म कर इसे सरकार की ‘मर्जी’ पर निर्भर बनाने का आरोप लगाया।

चेन्नई/नई दिल्ली, 23 दिसंबर: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (MGNREGA) कानून को बदलकर नया ‘विकसित भारत जी राम जी’ (VB-G RAM G) विधेयक लाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा कि इस योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना “बापू की दूसरी हत्या” के समान है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जानबूझकर देश के महापुरुषों की पहचान और विरासत को मिटाने का प्रयास कर रही है।

“गांधी और नेहरू को मिटाया नहीं जा सकता”

चिदंबरम ने भावुक होते हुए कहा, “महात्मा गांधी की पहली हत्या 30 जनवरी 1948 को हुई थी। अब उनके नाम को सरकारी रिकॉर्ड से हटाकर उनकी स्मृति को खत्म किया जा रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि गांधी और नेहरू जैसे व्यक्तित्व भारतीय लोगों की चेतना में बुद्ध और ईसा मसीह की तरह जीवित हैं। कोई भी सरकारी आदेश या नाम बदलने की प्रक्रिया उन्हें जनता के दिलों से बाहर नहीं निकाल सकती।

नए ‘जी राम जी’ विधेयक पर उठाए सवाल

संसद द्वारा हाल ही में पारित ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी-जी राम जी विधेयक पर टिप्पणी करते हुए चिदंबरम ने इसे एक ‘धोखा’ करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि मनरेगा के तहत काम मांगना एक ‘कानूनी अधिकार’ (Demand-driven entitlement) था, जिसे अब सरकार ने ‘विवेकाधीन योजना’ (Discretionary scheme) में बदल दिया है। उनके अनुसार, अब ग्रामीण गरीब केवल तभी काम मांग सकेंगे जब सरकार काम की पेशकश करेगी।

राज्यों पर आर्थिक बोझ और फंड की कटौती

चिदंबरम ने नए कानून की फंडिंग संरचना पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले केंद्र सरकार मजदूरी का पूरा खर्च उठाती थी, लेकिन अब इसे केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में बांट दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी राज्य के पास पर्याप्त संसाधन नहीं होंगे, तो वहां यह योजना लागू ही नहीं हो पाएगी। साथ ही, उन्होंने बताया कि मनरेगा का बजट जो कभी 1.11 लाख करोड़ रुपये था, उसे घटाकर अब केवल 65,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

दक्षिणी राज्यों के लिए नाम पर भ्रम

कांग्रेस नेता ने नए नाम ‘विकसित भारत जी राम जी’ के चयन पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि हिंदी शब्दों को अंग्रेजी अक्षरों में लिखकर बनाए गए ऐसे नाम दक्षिण भारत की ग्रामीण जनता के लिए पूरी तरह समझ से बाहर और भ्रमित करने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यह नाम केवल अपने राजनीतिक एजेंडे को साधने के लिए रखा है, जिससे उन 12 करोड़ लोगों का नुकसान होगा जो इस सुरक्षा कवच पर निर्भर हैं।

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