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सुपरबग्स को मारने के लिए एंटीबायोटिक: नई दवा उन बैक्टीरिया को मार देगी जिन पर एंटीबायोटिक्स अप्रभावी हैं; 70 लाख जिंदगियां बचाई जाएंगी

एक नई एंटीबायोटिक दवा की खोज से हर साल सुपरबग्स से लगभग 70 लाख लोगों की जान बचाई जा सकती है। सुपरबग बैक्टीरिया होते हैं जो एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक या गलत उपयोग के कारण अप्रभावी हो गए हैं।

जीवाणु प्रतिरक्षा का निर्माण करते हैं। ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने अब एक ऐसे एंटीबायोटिक की खोज की है जो एक शोध में सुपरबग्स को मार देता है। यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल के शोध से पता चला है कि इस दवा ने बिना किसी स्वस्थ ऊतक को नुकसान पहुंचाए चूहों में सुपरबग्स को मार दिया है।

2050 तक 1 करोड़ लोगों की मौत हो सकती है

यह टिक्सोबैक्टिन का सिंथेटिक रूप है, जो कई दशकों में खोजा गया पहला एंटीबायोटिक है। कोविड के दौरान लोगों को कई तरह के एंटीबायोटिक्स दिए गए, जिनका वायरस पर कोई असर नहीं होता। इससे सुपरबग से जान गंवाने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। यूके सरकार के एक आयोग ने अनुमान लगाया है कि 2050 तक सुपरबग्स हर साल एक करोड़ लोगों की जान ले सकते हैं।

कई जीवाणुओं को मारने में सफल

टिक्सोबैक्टिन चूहों में एमआरएसए सुपरबग को मारने में सफल रहा, जिस पर अब तक कई एंटीबायोटिक्स अप्रभावी साबित हुए हैं। यह इंसानों में पाए जाने वाले कई बैक्टीरिया को मारने में भी सफल रहा है। इसे सुपरबग्स के खिलाफ अंतिम बचाव के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। टिक्सोबेक्टिन को कमरे के तापमान पर संग्रहित किया जा सकता है। इससे इसे पूरी दुनिया में आसानी से भेजा जा सकता है।

लागत बहुत कम
2015 में, इस दवा की खोज अमेरिकी राज्य मेन में हुई थी। तब आम जनता को इसकी जानकारी नहीं दी जाती थी क्योंकि इसका उत्पादन बहुत महंगा होता था। अब वैज्ञानिक 2000 गुना कम लागत में इसका सिंथेटिक रूप बनाने में सफल हो गए हैं। अब टिक्सोबैक्टिन बड़ी मात्रा में बनाया जा सकता है।

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