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शत्रु संपत्ति मामले में CBI का छापा : अरबों रुपये की शत्रु संपत्ति बेचने वाले अधिकारियों के परिसरों पर छापेमारी

सीबीआई ने गुरुवार को शत्रु संपत्तियों को पट्टे पर देने के घोटाले में शामिल अधिकारियों और किराएदारों के परिसरों पर छापेमारी की. सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा लखनऊ, बाराबंकी, सीतापुर, दिल्ली और कोलकाता में पट्टाधारकों और अधिकारियों के 18 ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. यह कार्रवाई शत्रु संपत्ति के संरक्षक अभिषेक अग्रवाल की शिकायत पर की जा रही है. आरोप है कि शत्रु संपत्ति के कई संरक्षकों ने भारत सरकार की अनुमति के बिना अरबों रुपये की संपत्ति पट्टे पर दी थी।

भारत सरकार में शत्रु संपति के सहायक संरक्षक अभिषेक अग्रवाल ने तत्कालीन संरक्षक उत्पल चक्रवर्ती, तत्कालीन सहायक संरक्षक शत्रु संपति रमेश चंद्र तिवारी समेत नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी. जिनके नाम पर संपत्ति पट्टे पर दी गई थी। आरोप था कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच उन्होंने निजी लाभ लेकर बाराबंकी और सीतापुर जिलों की शत्रु संपत्ति को सस्ते दर पर पट्टे पर दिया। जिससे भारत सरकार को भारी नुकसान हुआ है। एक अन्य प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि 2016 से 2022 के बीच इन्हीं अधिकारियों ने लखनऊ की महंगी व्यावसायिक संपत्तियों को मामूली दरों पर फर्जी पट्टाधारकों के नाम पर दस्तावेजों में पट्टे पर दिया था।

लखनऊ में इन संपत्तियों के पट्टे में हुई थी धांधली-

  • 3.516 हेक्टेयर आम का बाग नौबस्ता ग्राम मलिहाबाद तहसील, लखनऊ में एक पट्टेदार को पट्टे पर दिया गया था।
  • मलिहाबाद के खाखरा गांव में 3.953 हेक्टेयर आम का बाग पट्टे पर पट्टे पर दिया गया था।
  • काकोरी के अजमत नगर में 19 एकड़ का आम का बाग एक व्यक्ति को पट्टे पर दिया गया था।
  • जुगौर गांव में 4.8403 हेक्टेयर भूमि दो लोगों को पट्टे पर दी गई थी।

 

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