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बंपर भर्ती से सुधरेगा स्वास्थ्य विभाग: सीएम योगी ने दिए निर्देश- 20 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका व 10 हजार पैरामेडिकल स्टाफ की होगी नियुक्ति

 

यूपी में 100 दिन के एजेंडे को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने विभागों का प्रेजेंटेशन चल रहा है. सीएम ने चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र के विभागों की कार्ययोजना पर दिशा-निर्देश जारी किए। सीएम ने कहा कि कैबिनेट के सामने दवा और सेहत को बेहतरीन बनाना है.

सीएम ने कहा कि पिछले 5 साल में यूपी में स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है. इंसेफेलाइटिस को मिटाने के प्रयास हों या कोविड प्रबंधन, राज्य को वैश्विक संस्थाओं से सराहना मिली है। एक टीम के रूप में प्रयास करते रहें।

6 माह में 20 हजार आंगनबाडी कार्यकर्ता व सहायिकाओं की होगी नियुक्ति
प्रेजेंटेशन के बाद सीएम ने निर्देश दिया कि आंगनबाडी वर्कर व सहायिकाओं के 20 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया अगले 6 माह में पूरी कर ली जाए. सभी आंगनबाडी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य मित्रों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ प्रदान किया जाए। प्रत्येक कार्यकर्ता और सहायक को दो-दो साड़ियां दी जाएं। उनके मूल्यांकन और प्रमाणन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

10 हजार पैरामेडिकल स्टाफ की होगी नियुक्ति

सीएम ने कहा कि पैरामेडिकल स्टाफ स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ है। हम सभी ने कोविड काल में पैरामेडिक्स के महत्व को बहुत करीब से समझा है। स्वास्थ्य विभाग अगले 6 महीने में 10,000 पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति करे। यह प्रक्रिया यूपी अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से पूरी की जानी चाहिए। डॉक्टर-नर्स का अनुपात 1:1 होना चाहिए। आवश्यकता के अनुसार योग्य पेशेवरों का चयन किया जाना चाहिए। प्रत्येक जिले में मुख्यालय के अलावा प्रथम रेफरल इकाई जैसे सीएचसी, 100 फ्लीट आदि की स्थापना की जाए। हर जिले में ड्रग हाउस की व्यवस्था की जाए।

हर विधानसभा में 100 बेड का अस्पताल बने

योगी ने कहा कि सभी विधानसभा क्षेत्रों में 100 बिस्तरों वाले अस्पताल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. एक विस्तृत कार्य योजना तैयार करें और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करें। सीएम ने कहा कि 5 साल में 5000 स्वास्थ्य उपकेंद्र स्थापित करने का काम किया गया है. अब हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि अगले 5 साल में 10 हजार नए उपकेंद्र स्थापित किए जाएं।

इतना ही नहीं हर जिले में मुफ्त डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। डायलिसिस, सिटी स्कैन, नवजात स्थिरीकरण इकाइयों, विशेष नवजात देखभाल इकाइयों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है। अगले दो वर्षों में सभी जिलों में इन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

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