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महंगे तेल से कंपनियों की बंपर कमाई: पेट्रोल-डीजल से मिली रिकॉर्ड महंगाई

देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल के मंगलवार को आए वित्तीय नतीजे बताते हैं कि कंपनी ने मुनाफे के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. जनवरी-मार्च के दौरान जब कहा गया कि तेल कंपनियों को 9 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो रहा है, उस तिमाही में इंडियन ऑयल ने 6,021.88 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। देश के पेट्रोलियम बाजार में कंपनी की करीब आधी हिस्सेदारी है।

इंडियन ऑयल देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी है। वित्तीय नतीजों के मुताबिक 2020-21 में कंपनी की समेकित आय 7.36 लाख करोड़ रुपये रही। कंपनी के निदेशक-वित्त संदीप गुप्ता ने कहा, ‘यह एक ही वित्तीय वर्ष में किसी भी कंपनी की आय से अधिक है। कंपनी ने इस दौरान 24,184.10 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है, जो अब तक का रिकॉर्ड है।

मार्च के आखिरी 10 दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े थे
इंडियन ऑयल ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान निर्यात सहित 864.07 लाख टन उत्पाद बेचे थे। 1 जनवरी से 21 मार्च तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहीं। मार्च के आखिरी 10 दिनों में नौ दिनों तक कीमतों में उछाल आया था।

देश में महंगाई 15 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है
केंद्र सरकार 2012-13 से नई श्रृंखला से थोक मूल्य सूचकांक (WPI) डेटा जारी कर रही है। इस हिसाब से 15.08% दस साल का उच्चतम आंकड़ा है। अप्रैल 2021 से 13वें महीने WPI आधारित थोक महंगाई दर 10% से ऊपर बनी हुई है। दूसरी ओर, खाद्य पदार्थों, पेट्रोल, डीजल और अन्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण अप्रैल में थोक मूल्य बढ़कर रिकॉर्ड 15.08% हो गया। यह पिछले महीने (मार्च में) 14.55% और एक साल पहले यानी अप्रैल 2021 में 10.74% थी।

थोक महंगाई का भी खुदरा पर असर
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है कि विनिर्मित उत्पादों का डब्ल्यूपीआई का भारांक 64.23 फीसदी है, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) यानी खुदरा का भारांक कम है। यदि थोक में खाद्य पदार्थ महंगे हैं तो सीपीआई का प्रभाव कम होता है। सेवाएं WPI में शामिल नहीं हैं। सीपीआई में स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन भी शामिल है।

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