
नई दिल्ली, 31 जुलाई : ICSI (The Institute of Company Secretaries of India), नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया (AIBI) ने संयुक्त रूप से “SME Fundraising Conclave – Key Growth Opportunity” का आयोजन किया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम 30 जुलाई 2026 को ICSI हाउस, नोएडा और 31 जुलाई 2026 को ICSI CCGRT मानेसर में आयोजित किया गया। इस कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य लघु और मध्यम उद्यमों (SMEs) को पूँजी बाजार तक पहुँचने और विकास के नए अवसर प्रदान करने के लिए प्रेरित करना था।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के मुख्य महाप्रबंधक श्री राजेश कुमार डांगेती मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ मंच पर NSE की एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट सुश्री पार्वती मूर्ति, AIBI के CEO डॉ. मिलिंद दलवी, ICSI के पूर्व अध्यक्ष CS धनंजय शुक्ला, काउंसिल मेंबर CS मनोज पुरबे और FSC के चेयरमैन CS आशीष करोरिया मौजूद रहे। इन दिग्गजों ने SMEs के विकास के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने पर जोर दिया।

IPO तैयारियों पर मंथन
कॉन्क्लेव के दौरान “IPO Readiness – Preparedness, Due Diligence, and Financial Discipline” विषय पर एक विस्तृत पैनल चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे वित्तीय अनुशासन और उचित तत्परता (Due Diligence) किसी भी SME को सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए तैयार कर सकती है। 30 जुलाई को CS राजीव बजाज और श्री संजीव गुप्ता ने अपने विचार साझा किए, जबकि 31 जुलाई को CS शशि भूषण सिंह, श्री पंकज खेतान और श्री यश गर्ग ने पैनल में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया।
SEBI की नई पहल और भविष्य की राह
कार्यक्रम का सबसे मुख्य आकर्षण SEBI द्वारा SMEs के लिए एक समर्पित पोर्टल की घोषणा रही। यह पोर्टल जारीकर्ता कंपनियों (Issuers) के लिए आवश्यक जानकारी और अनुपालन (Compliance) संबंधी स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करेगा, जिससे SMEs का पूँजी बाजार में प्रवेश सुगम हो जाएगा। साथ ही, SEBI अपने LODR (Listing Obligations and Disclosure Requirements) ढांचे की समीक्षा कर रहा है ताकि अनावश्यक जटिलताओं को कम किया जा सके और बिना किसी समझौते के निवेशक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
निष्कर्ष
यह कार्यक्रम नियामक निकायों, बाजार मध्यस्थों और SMEs के बीच संवाद का एक बेहतरीन मंच साबित हुआ। ICSI का यह प्रयास न केवल सुशासन (Good Governance) को बढ़ावा देता है, बल्कि समावेशी आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसी पहल से भारत के लघु उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होंगे।
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