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पाकिस्तान की बेगिंग इंडस्ट्री: 42 अरब डॉलर का काला बाजार

3.8 करोड़ पेशेवर भिखारी और 117 खरब का कारोबार; पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बना बड़ा खतरा

पाकिस्तान की बेगिंग इंडस्ट्री
  • पाकिस्तान में लगभग 3.8 करोड़ पेशेवर भिखारी हैं, जो देश की कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं।
  • एक भिखारी औसतन 850 से 2,000 रुपये रोजाना कमाता है, जिससे यह सालाना 42 अरब डॉलर का उद्योग बन गया है।
  • इस संगठित ‘भीख माफिया’ के कारण न केवल पाकिस्तान की वैश्विक छवि धूमिल हो रही है, बल्कि महंगाई भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है।

इस्लामाबाद, 23 दिसंबर: आर्थिक तंगी और विदेशी कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान के सामने अब एक नया और चौकाने वाला संकट खड़ा हो गया है। हालिया रिपोर्ट्स और आर्थिक सर्वेक्षणों के अनुसार, पाकिस्तान में ‘भीख मांगना’ अब केवल मजबूरी नहीं, बल्कि 42 अरब डॉलर (लगभग 3.5 लाख करोड़ भारतीय रुपये) का एक संगठित और फलता-फूलता काला बाजार बन चुका है। यह आंकड़ा पाकिस्तान की कुल जीडीपी के 12% से भी अधिक है, जो देश की विकास दर को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।

3.8 करोड़ भिखारी और कमाई का गणित

पाकिस्तान के ‘सेंटर फॉर बिजनेस एंड सोसाइटी’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में करीब 3.8 करोड़ लोग भीख मांगने के पेशे से जुड़े हैं। आंकड़ों के मुताबिक, कराची जैसे बड़े शहरों में एक भिखारी प्रतिदिन औसतन 2,000 रुपये तक कमा लेता है, जबकि लाहौर और इस्लामाबाद में यह आंकड़ा क्रमशः 1,400 और 950 रुपये है। सामूहिक रूप से, ये भिखारी हर दिन देश की जनता की जेब से लगभग 32 अरब रुपये दान के रूप में निकालते हैं।

विदेशी धरती पर पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगी

पाकिस्तान का यह ‘बेगिंग मॉडल’ अब सरहदों के पार भी पहुँच गया है। दिसंबर 2025 की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब ने अकेले इस साल 24,000 से अधिक पाकिस्तानी भिखारियों को निर्वासित (Deport) किया है। इसके अलावा यूएई और अज़रबैजान से भी हजारों की संख्या में पाकिस्तानी नागरिक भीख मांगने के आरोप में पकड़े गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि खाड़ी देशों में पकड़े जाने वाले भिखारियों में से 90% पाकिस्तानी मूल के होते हैं, जो अक्सर उमराह या तीर्थयात्रा के वीजा पर वहां पहुँचते हैं।

संगठित माफिया और बच्चों का शोषण

यह महज व्यक्तिगत प्रयास नहीं है, बल्कि एक शक्तिशाली ‘भीख माफिया’ द्वारा संचालित नेटवर्क है। ये गिरोह बच्चों, दिव्यांगों और महिलाओं को ट्रैफिकिंग के जरिए इस काम में धकेलते हैं। कराची और लाहौर के व्यस्त ट्रैफिक सिग्नल्स पर भिखारियों की शिफ्ट तय होती है और उनके इलाकों का बंटवारा किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गैर-उत्पादक आबादी अर्थव्यवस्था पर बोझ है, क्योंकि यह पैसा किसी वस्तु या सेवा के उत्पादन में इस्तेमाल होने के बजाय केवल महंगाई (Inflation) बढ़ाने का काम करता है।

सरकार की कार्रवाई और AI का इस्तेमाल

बढ़ती अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती को देखते हुए पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (FIA) ने कड़े कदम उठाए हैं। साल 2025 में अब तक 66,000 से अधिक यात्रियों को हवाई अड्डों पर ही रोक दिया गया क्योंकि उनके विदेश जाकर भीख मांगने का संदेह था। सरकार अब संदिग्धों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा ले रही है और संगठित गिरोहों के लिए 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है।

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