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अयोध्या में पीएम ने रामलला के दर्शन और पूजा अर्चना के बाद सम्बोधन में ये बड़ी बाते कही

आज अयोध्या में दीपोत्सव में दर्शन लेने पीएम खास तौर पर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले रामलला के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया। दर्शन के बाद प्रधानमंत्री ने  राम मंदिर के नक़्शे को देखने के बाद उसकी जानकारी ली साथ ही साथ उन्होंने निर्माण कार्यों का भी निरिक्षण किया। इसके बाद पीएम ने महृषि वशिष्ठ की भूमिका निभाते हुए श्रीराम का राजतिलक कर आरती उतारी और सभा को संबोधित किया।

प्रधानमंत्री ने कहा “श्री रामलला के दर्शन और उसके बाद राजा राम का अभिषेक, ये सौभाग्य रामजी की कृपा से ही मिलता है। जब श्रीराम का अभिषेक होता है तो हमारे भीतर भगवान राम के आदर्श, मूल्य और दृढ़ हो जाते हैं। आजादी के अमृतकाल में भगवान राम जैसी संकल्प शक्ति, देश को नई ऊंचाई पर ले जाएगी। भगवान राम ने अपने वचन में, अपने विचारों में, अपने शासन में, अपने प्रशासन में जिन मूल्यों को गढ़ा, वो सबका साथ-सबका विकास की प्रेरणा हैं और सबका विश्वास-सबका प्रयास का आधार हैं।”

आगे पीएम कहते हैं “एक समय वो भी था जब हमारे ही देश में श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाए जाते थे। इसका नतीजा यह हुआ कि हमारे देश के धार्मिक स्थलों का विकास पीछे छूट गया। पिछले आठ साल में हमने धार्मिक स्थानों के विकास के काम को आगे रखा है। भगवान श्रीराम का जीवन बताता है कि हमारे अधिकार हमारे कर्तव्य से स्वयंसिद्घ हो जाते हैं। श्रीराम ने अपने जीवन में कर्तव्यों को सर्वाधिक जोर दिया। उन्होंने वन में रहकर साधुओं की संगत की।”

पीएम मोदी ने अयोध्यावासियों को सम्बोधित करते हुए कहा “अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के साथ ही आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ जाएगी। ऐसे में अयोध्या स्वच्छ और यहां के लोगों का व्यवहार अच्छा हो। यह यहां के लोगों को तय करना है। उन्होंने कहा कि कितना अच्छा हो कि अयोध्या के नागरिकों का व्यवहार भी अपने आप में मानक बने।”

सम्बोधन के अंत में प्रधानमंत्री का कहना था की “लाल किले से मैंने सभी देशवासियों से पंच प्राणों को आत्मसात करने का आह्वान किया है। इन पंच प्रांणों की ऊर्जा जिस एक तत्व से जुड़ी है, वो है भारत के नागरिकों का कर्तव्य। आज अयोध्या नगरी में, दीपोत्सव के इस पावन अवसर पर हमें अपने इस संकल्प को दोहराना है, श्रीराम से सीखना है।”

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