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घर की छोटी सी जगह में भी कर सकते हे आलू की खेती।

आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है. भारत में शायद ही कोई ऐसा रसोई घर होगा जहाँ पर आलू ना दिखे. इसकी मसालेदार तरकारी, पकौड़ी, चॉट, पापड चिप्स जैसे स्वादिष्ट पकवानो के अलावा अंकल चिप्स, भुजिया और कुरकुरे भी हर जवां के मन को भा रहे हैं.

आलू की खेती के लिए भूमि एवं जलवायु
साथ ही अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी और बलुई दोमट मिट्टी जिसकी पीएच मान 5.5 से 5.7 के बीच हो। आलू की खेती के लिए ठंड का मौसम अर्थात रबी का सीजन काफी उपयुक्त है। इसके लिए दिन का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तक होनी चाहिए।

आलू की खेती में क्या क्या डालना चाहिए?
आलू की बेहतर फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 150 से 180 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस और 100 किलोग्राम पोटाश की जरूरत होती है। फास्फोरस व पोटाश की पूरी और एंड्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय ही खेत में डालनी होती है। बची हुई नाइट्रोजन को मिट्टी चढ़ाते समय खेत में डाला जाता है।

आलू में पहली सिंचाई कब करें?
पहली सिंचाई पौधों के उगने के बाद करनी चाहिए। पहली सिंचाई बुवाई के करीब 10 से 12 दिनों के बाद करें। अगर बुवाई से पहले खेत में पलेवा नहीं किया गया है तो बुवाई के 2-3 दिनों के अंदर हल्की सिंचाई करना आवश्यक है। इससे प्रति पौधा कंद की संख्या में वृद्धि होगी और उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।

आलू कितने दिन में तैयार हो जाता है?
आलू की खेती में इस किस्म में फसल 100 से 130 दिन में तैयार हो जाती है और 250-275 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज होती है।

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