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धर्मं / ज्योतिष

शुभ संयोग : 9 को गंगा दशहरा और वेदमाता गायत्री का प्राकट्य दिवस, 10 जून को निर्जला एकादशी; रविवार को होगा प्रदोष व्रत

तारीख़ 9 जून तक ख़राब होने की तारीख तक, धरणोप, देव प्रतिष्ठा प्रतिष्ठान से ख़रीदने के लिए मंगल ग्रह की ख़राबी। 9 जून को मां गंगा का अवतरण दिवस है। साथ ही वेद माता गायत्री का पर्व भी मनेगा। 10 जून को मोक्षदाय निजला एकादशी पर्व। एक दिन पहले I गंगा दशहरा स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त है। इस नक्षत्र के जन्म के बाद कन्या राशि होगी और सूर्य वृष राशि में बुध के साथ बुधादित्य शुभ योग होगा। इस दिन की शुभता में वृद्धि। इन पर्वों पर पवित्र व्रत और पूजा के लिए हर तरह के रोग और दोष समाप्त हो गए हैं।

गंगा दशहरा: 9 जून, गुरुवार
गंगा नदी की सफाई करने वाला और जल की अहमियत रखने वाला होना चाहिए। कुछ में गंगा नदी को भी जोड़ा गया है। S क योंकि ये अपने गुणों के के के rayrी दूस नदियों से से ज ज ज ज ज इस वजह से ज्येयेष्ठी बढ़ाव से ठीक किया गया।

भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो ब्रह्मपुत्र नदी से बड़ी हैं। लेकिन वैज्ञानिक जलवायु के हिसाब से भी बेहतर है और लाभकारी भी है। इस पर्व पर पवित्र पवित्रा की पूजा की गई।

निर्जला एकादशी: 10 जून, शुक्रवार
गंगा दश के अगले दिन ही निजला एकादशी का व्रत है। इस वthirत में r पू पू दिन दिन दिन दिन नहीं kasauna नहीं नहीं नहीं कथा के अनुसार महाभारत काल में पहले भी ने इस व्रत को था। इसलिए भीमसेनी एकादशी भी कहा गया है।

उत्सव में शामिल होने के बाद विष्णु भगवान विष्णु की पूजा करें। पूरे दिन भर खाने वाले भोजन में पानी भरकर व्रत करते हैं। इस व्रत पर विष्णु की भी पूजा की जाती है। इस व्रत से जल का महत्व पता चलता है.

गायत्री प्राकट्य पर्व: 10 जून, शुक्रवार
माँ गायत्री को वेदमाता हैं। ही सभी पैदाइशी हैं। तब से। ज्येष्ठ के शुक्ल की एकादशी तिथि तिथि तिथि होती है। इस बार गायत्री 10 नवंबर, शुक्रवार है। वेदमाता गायत्री की उपासना से मनोभावों को पूरा करते हैं।

माँ गायत्री से आयु, प्राण, प्रजा, पशु, कीर्ति, धन और ब्रह्मब्रस फल मिलते हैं। माँ गायत्री को दर्द हुआ है। ये पंचतत्वों के प्रतिक हैं। ये है कि ब्रह्मांड के ब्रह्मांड में प्राण शक्ति के रूप में गायत्री है। इस तरह हर दिन मां गायत्री की उपासना किया गया।

रवि प्रदोष व्रत: 12 जून, रविवार
अंतिम को त्रयोदशी तिथि होने से वी प्रदोष योग 12 जून को। इस घटना का महत्व भी बढ़ गया है। इस दिन शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत किया गया। प्रभाव से दाम्पत्य जीवन में सुखद होता है। सूर्य प्रदोष के योग में शिव-पार्वती पूजा से रोग, हर प्रकार का दोष खत्म हो जाएगा। जल्‍वेक पर जल्‍वेक का यह मामला है।

 

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